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तेजस्वी-राबड़ी की पसंद में अटका RJD का MLC प्रत्याशी चयन, अंतिम मुहर लालू लगाएंगे

Published: Fri, 05 Jun 2026 05:30 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 05 Jun 2026 07:06 AM (GMT+05:30)

राजद विधान परिषद की एक सीट के लिए प्रत्याशी चयन में फंसा है, जहां राबड़ी देवी सुनील कुमार सिंह और ...और पढ़ें

अंतिम सहमति लालू की मुहर के बाद

अंतिम सहमति लालू की मुहर के बाद

HighLights

  1. राजद विधान परिषद सीट पर प्रत्याशी चयन में गतिरोध।

  2. राबड़ी देवी सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाना चाहती हैं।

  3. तेजस्वी यादव शिवचंद्र राम के पक्ष में खड़े हैं।

राज्य ब्यूरो, पटना। राजद की विधान परिषद की एक सीट के लिए प्रत्याशी चयन अब अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन नाम पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।

मुख्य दावेदारों में सुनिल कुमार सिंह और शिवचंद्र राम का नाम सबसे आगे चल रहा है। अंतिम निर्णय पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव करेंगे, जिनके जल्द पटना लौटने की संभावना है।

राबड़ी देवी की पसंद हैं सुनिल कुमार सिंह

बताया जा रहा है कि राबड़ी देवी चाहती हैं कि सुनिल कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया जाए। यह सीट पहले भी उन्हीं के कोटे की मानी जाती रही है।

पार्टी के भीतर इस नाम को लेकर मजबूत समर्थन देखा जा रहा है, खासकर राबड़ी आवास के स्तर पर।

तेजस्वी यादव का फोकस सामाजिक संतुलन पर

दूसरी ओर तेजस्वी यादव शिवचंद्र राम के पक्ष में बताए जा रहे हैं।

उनका मानना है कि अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण होगा। पार्टी के भीतर सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति इस दावे के पीछे प्रमुख वजह मानी जा रही है।

लालू प्रसाद की भूमिका निर्णायक बनी

कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर तेजस्वी यादव अधिकतर फैसले लेते हैं, लेकिन प्रत्याशी चयन जैसे बड़े मामलों में लालू प्रसाद की राय अब भी निर्णायक मानी जाती है।

परिवार के भीतर भी अंतिम सहमति लालू की मुहर के बाद ही बनती है।

सिंगापुर से लौटने पर होगा अंतिम फैसला

लालू प्रसाद फिलहाल स्वास्थ्य जांच के लिए सिंगापुर में हैं और उनके नामांकन की अंतिम तारीख से पहले पटना लौटने की संभावना है।

माना जा रहा है कि राबड़ी आवास पर परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद अंतिम नाम तय होगा।

एआईएमआईएम फैक्टर और गठबंधन की जटिलता

इस सीट के चुनाव में एआईएमआईएम की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजद को उनके समर्थन की उम्मीद है, जबकि एआईएमआईएम अपने पुराने राजनीतिक सहयोग का बदला चाहती है।

सीमित विधायकों के कारण महागठबंधन के लिए समीकरण और भी जटिल हो गए हैं।

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