पटना [एसए शाद]। रालोसपा अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार को भूल कर अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। वह 15 जुलाई तक तय कर लेंगे कि किन-किन सीटों पर उन्हें विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में रालोसपा एनडीए में रहकर 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। दो सीटों पर इसे कामयाबी मिली थी।

पार्टी संगठन को मजबूत कर आगे की रणनीति बनाएंगे

पार्टी सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कई वरिष्ठ सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा का साथ छोड़ गए। चुनाव के नतीजे आने के बाद कार्यकर्ताओं का भी मनोबल टूटा है। पार्टी ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा, मगर एक भी जीत नहीं पाई। विधानसभा चुनाव की तैयारी आरंभ कर वह अपने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं। साथ ही नए लोगों को पार्टी की ओर आकर्षित करने की उनकी कोशिश होगी, मगर इससे भी अहम यह बात होगी कि वह पार्टी संगठन को मजबूत कर आगे की रणनीति बनाएंगे।

इसलिए एनडीए से नाता तोड़े थे कुशवाहा

2013 में गठित रालोसपा ने 2014 का लोकसभा और 2015 का विधानसभा चुनाव एनडीए में रहकर लड़ा था। पार्टी ने 2014 लोकसभा चुनाव में तीन सीटें हासिल की थीं। खुद उपेंद्र कुशवाहा काराकाट लोकसभा क्षेत्र से विजयी हुए थे। वहीं, 2015 विधानसभा चुनाव में उन्हें दो सीटें मिली थीं, मगर उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ इस बार महागठबंधन का हिस्सा बनकर जब लोकसभा चुनाव लड़ा तो एक भी सीट नहीं जीत पाए। रालोसपा को अधिक सीटें नहीं मिलने के कारण ही उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ा था।

28 जून को जिलावार होगी सघन समीक्षा 

विधानसभा चुनाव में भी उनका प्रयास होगा कि तालमेल में उन्हें अधिक सीटें मिले। राजनीतिक गलियारे में इस बात को भी नोटिस किया जा रहा है कि केंद्र में नई सरकार के शपथ ग्रहण के समय से भाजपा और जदयू के बीच आरंभ हुए शीतयुद्ध के बाद उपेंद्र कुशवाहा प्रदेश की राजनीति में फिर अहम हो गए हैं। रालोसपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने 19 जून को जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई है, जबकि 28 जून से जिलावार बूथ स्तर तक की सघन समीक्षा की जाएगी। हर दिन दो-तीन जिलों की समीक्षा होगी और 10 जुलाई तक इसे संपन्न करने का प्रयास होगा। इसी सघन समीक्षा के क्रम में वह उन सीटों को चिह्नित कर लेंगे, जिन पर वह अगले विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारेंगे। अगस्त से रालोसपा अपना सघन सदस्यता अभियान आरंभ करेगी।

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