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छोटी शुरुवात से करोड़ों के टर्न ओवर तक: मिल्क कंपनी से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहीं बिहार की जीविका दीदियां

Published: Mon, 05 Oct 2026 07:00 AM (IST)

सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी से जुड़कर 49 हजार से अधिक जीविका दीदियों ने डेयरी व्यवसाय को करोड़ों का कारोबार बना दिया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी से 49 हजार से अधिक जीविका दीदियां जुड़ीं।

  2. डेयरी व्यवसाय को करोड़ों के कारोबार में बदलकर महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर।

  3. दूध संग्रह और सदस्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

राज्य ब्यूरो, पटना। पशुपालन अब केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाला एक सफल उद्यम बन रहा है।

इसी क्रम में वर्ष 2017 में स्थापित सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी लिमिटेड से जुड़ीं करीब 49 हजार से भी अधिक जीविका दीदियों ने कठिन मेहनत एवं लगन के बदौलत दूध उत्पादन एवं उसके खरीद-बिक्री के कारोबार को आज कारोड़ों में पहुंचाकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखने का काम किया है।

ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार सहरसा में कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी का गठन सितंबर 2017 में किया गया था, जबकि इसका व्यावसायिक संचालन अक्टूबर 2018 से शुरू हुआ।

आरंभ में सहरसा, सुपौल एवं मधेपुरा में डेयरी मूल्य शृंखला विकसित करने की योजना बनाई गई थी, जिसका बाद में खगड़िया तथा मुंगेर तक इसका विस्तार किया गया। इस कंपनी को बिहार जीविका से वित्तीय सहायता और एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज से तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है।

वर्ष 2019-20 में जहां कंपनी से 16,656 महिला सदस्य जुड़ी थीं, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या बढ़कर 49,344 हो गई है। इसी अवधि में औसत दैनिक दूध संग्रह 11,436 किलोग्राम से बढ़कर 94,180 किलोग्राम तक पहुंच गया है।

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