पटना [जेएनएन]। दुमका कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित चारा घोटाला मामले में बिहार के मुख्य सचिव व  दुमका के तत्कालीन उपायुक्त अंजनी कुमार सिंह सहित सात लोगों को अदालत ने चारा घोटाला में सीबीआइ ने आरोपी बनाया था और सशरीर कोर्ट में उपस्थित होने के लिए सम्मन भेजा था। लेकिन झारखंड हाई कोर्ट ने आज उन्हें बड़ी राहत देते हुए कोर्ट की नोटिस पर तत्काल रोक लगा दी है।

बता दें कि विगत पांच मार्च को रांची की सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने अंजनी कुमार सहित तत्कालीन वित्त सचिव विजय शंकर दुबे, सीबीआई के गवाह और आपूर्तिकर्ता दीपेश चांडक, बिहार के पूर्व डीजीपी व निगरानी के तत्कालीन एडीजी डीपी ओझा, सीबीआई के तत्कालीन इंस्पेक्टर व वर्तमान एएसपी और अनुसंधान पदाधिकारी एके झा, सीबीआई के गवाह आपूर्तिकर्ता शिव कुमार पटवारी और फूल झा को आरोपी बनाया था।

अदालत ने कहा है कि घोटाले में इनकी भी संलिप्तता है। सीबीआइ ने इन्हें बचाने का कार्य किया है। इन सातों आरोपियों को 28 मार्च को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। हाजिर होने के लिए अदालत ने समन जारी किया था।

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत सभी को आरोपी बनाया है।

जानकार अधिवक्ताओं के अनुसार सीआरपीसी की धारा 319 के तहत कोर्ट को यह अधिकार है कि किसी मामले की सुनवाई के दौरान केस में बनाए गये अभियुक्त के अलावे किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्य आया है तो उसे सीआरपीसी की धारा 319 के तहत मामले में आरोपी बनाकर हाजिर होने के लिए नोटिस जारी कर सकता है।

Posted By: Kajal Kumari

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