Nitish Kumar के करीबी रहे सांसद की जा सकती है सदस्यता, JDU नेता बोले- कड़ा कदम उठाना जरूरी
जदयू ने बांका सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए स्पीकर ओम बिरला को सूचना दी है। ...और पढ़ें

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

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राज्य ब्यूरो, पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बांका के अपने सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर ओम बिरला को सूचना दी है। यह सूचना जदयू संसदीय दल के नेता दिलकेश्वर कामत ने दी है।
उन्होंने सूचना के माध्यम से सांसद गिरिधारी यादव को दल विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने से लोकसभा अध्यक्ष को अवगत कराया है और उन्हें अयोग्य ठहराने की सिफारिश की है। साथ ही, उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की है।
दिलकेश्वर कामत ने कहा है कि पार्टी संगठनात्मक अनुशासन से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। सांसद गिरधारी यादव पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और पार्टी लाइन से हटकर बयान देने के पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन पर लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।
कामत ने आगे कहा, कई मौकों पर पार्टी लाइन से हटकर उन्होंने रुख अपनाया है। अब गिरिधारी यादव की संसद सदस्यता खत्म करने पर अब फैसला लोकसभा अध्यक्ष को लेना है। फिलहाल, जदयू के इस कड़े फैसले से राज्य के राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त हलचल है, क्योंकि कभी गिरिधारी यादव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माना जाता रहा था।
सांसद गिरिधारी पर यह है आरोप
सांसद गिरिधारी यादव के पुत्र चाणक्य प्रकाश रंजन ने विगत विधासभा चुनाव में बेलहर सीट से राजद के टिकट पर एनडीए के जदयू उम्मीदवार मनोज यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव हार गए थ।
दिलकेश्वर कामत के मुताबिक, सांसद गिरिधारी यादव ने पार्टी का अनुशासन तोड़कर पुत्र के पक्ष में न केवल चुनाव प्रचार किया था, बल्कि पुत्र के पक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। इतना ही नहीं, हाल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा से भी गिरिधारी यादव ने दूरी बनाई थी, जबकि बांका के इस कार्यक्रम के मंच पर सभी बड़े नेता मौजूद थे।
'मुझे निमंत्रण नहीं मिला था...'
इसमें शामिल नहीं होने पर गिरधारी यादव ने सफाई दी थी कि उन्हें कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला था। किंतु, जदयू ने इसे उनकी सोची-समझी नीतीश कुमार के कार्यक्रम के प्रति बेरुखी माता है।
इससे भी पहले सांसद गिरधारी यादव ने एसआईआर पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से हटकर टिप्पणी की थी। उन्होंने इस फैसले को जल्दबाजी में लिया गया गलत कदम करार दिया था। तब पार्टी ने इसे खुलेआम अनुशासनहीनता माना था।
जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
गिरिधारी यादव बोले- उनकी आस्था पार्टी नेतृत्व और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अटूट है। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष को उनके खिलाफ सूचना देने की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। यदि आधिकारिक रूप से सूचना प्राप्त होता है तो वे इसका जवाब लोकसभा अध्यक्ष को देंगे।
