पटना [राज्य ब्यूरो]। गुजरात में अपने प्रदर्शन से जदयू संतुष्ट है। पिछली बार पार्टी ने 35 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 34 की जमानत जब्त हो गई थी। पिछली बार की तरह इस बार भी जदयू ने अकेले चुनाव लड़ा था और उसके 36 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से चार को लगभग चार-चार हजार वोट मिले हैं। पार्टी के मुताबिक, ये चारों अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे।

जदयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि हमारा उद्देश्य अपने चुनाव चिह्न और कार्यक्रमों को प्रचारित करना था। हम अपनी छोटी उपलब्धि पर भी प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि छोटू भाई बसावा पिछले दस सालों से गुजरात जदयू के अध्यक्ष थे। उनके पार्टी छोड़कर जाने के बावजूद हमारा पहले से बेहतर प्रदर्शन रहा है। वहीं शरद खेमे के अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि जदयू की सभी सीटों पर जमानत जब्त है। चार हजार वोट लाने से जमानत नहीं बचती।

विदित हो कि शरद खेमे के छोटू भाई बसावा कांग्रेस के साथ तालमेल में भारतीय ट्रायबल पार्टी के चुनाव चिह्न पर गुजरात चुनाव लड़े थे। वह और उनके पुत्र महेश भाई बसावा अपनी जीत दर्ज कराने में कामयाब रहे। भारतीय ट्रायबल पार्टी ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और उसे दो पर जीत हासिल हुई है।

जदयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि छोटू भाई बसावा को शरद यादव ने अपने तथाकथित दल का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। परन्तु वह चुनाव से ठीक पहले उन्हें छोड़ भारतीय ट्रायबल पार्टी में शामिल हो गए।

उन्होंने कहा कि छोटू भाई बसावा और उनके पुत्र 2007 में जदयू के चुनाव चिह्न पर जीते थे। पिछले चुनाव में उनके पुत्र ने भारतीय ट्रायबल पार्टी बना ली, जबकि छोटू भाई बसावा जदयू में ही रहे। त्यागी ने कहा कि शरद यादव गुजरात में 8-10 दिन चुनाव प्रचार करते थे, लेकिन छोटू भाई बसावा के दूर चले जाने के कारण इस बार केवल एक दिन प्रचार किया।

शरद खेमे के अरुण श्रीवास्तव ने त्यागी के दावे को खारिज करते हुए कहा छोटू भाई बसावा तकनीकी कारणों से भारतीय ट्रायबल पार्टी में गए हैं। शरद यादव ने तीन दिनों तक वहां प्रचार किया है और राज्यसभा की सदस्यता समाप्त किए जाने की खबर सुनकर वह बीच में ही प्रचार कार्यक्रम छोड़ दिल्ली लौट गए थे।

Posted By: Ravi Ranjan

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