जमुई नाबालिग पीड़िता की तस्वीर को लेकर सियासी घमासान, राजद ने CM के खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई की मांग
जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा होने को लेकर बिहार में सियासी घमासान तेज हो गया ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर मुकदमे की मांग को लेकर बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को ज्ञापन देते हुए राजद का प्रतिनिधिमंडल। फोटो: राजद
HighLights
राजद ने मुख्यमंत्री के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई मांगी।
नाबालिग पीड़िता की तस्वीर मुख्यमंत्री के एक्स अकाउंट से साझा हुई।
बाल अधिकार और महिला आयोग को राजद ने ज्ञापन सौंपा।
राज्य ब्यूरो, पटना। जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। राजद के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को बिहार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बिहार राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
राजद ने आरोप लगाया कि पीड़िता से जुड़ी तस्वीर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक एक्स अकाउंट से साझा हुई थी। पार्टी ने इसे लेकर मुख्यमंत्री के विरुद्ध POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है। तस्वीर बाद में सोशल मीडिया हैंडल से हटाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
राजद ने आयोगों को सौंपा ज्ञापन
राजद प्रतिनिधिमंडल ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी। पार्टी की ओर से कहा गया कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने से जुड़े मामले में अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है।
महिला आयोग के समक्ष भी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांग रखी। राजद ने संबंधित कानूनों के तहत मामले की जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि पीड़िता की पहचान की गोपनीयता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
POCSO और किशोर न्याय कानून का दिया हवाला
राजद ने अपने ज्ञापन में POCSO एक्ट की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 का हवाला दिया। पार्टी ने कहा कि बाल यौन अपराध पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री के प्रकाशन को लेकर कानून में प्रावधान हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी नाबालिग यौन अपराध पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखने को लेकर निर्देश दे चुका है। अदालत ने कहा है कि मीडिया या सोशल मीडिया पर ऐसी जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए, जिससे पीड़ित की पहचान हो सके।
मामले में पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री के आधिकारिक हैंडल से पीड़िता की तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले में सीएम सचिवालय में तैनात स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।
ऐसे में राजद की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। पार्टी का कहना है कि मामले में कानून के मुताबिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
पहचान उजागर होने को लेकर उठे सवाल
नाबालिग पीड़िता से जुड़ी तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद उसकी पहचान की गोपनीयता को लेकर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में पीड़ित की पहचान उजागर करने वाले नाम या ऐसे तथ्य प्रकाशित करने पर रोक का उल्लेख है, जिनसे पहचान सामने आ सकती है।
इसी आधार पर विपक्षी दल मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, तस्वीर पोस्ट किए जाने की जिम्मेदारी और संबंधित प्रक्रिया को लेकर जांच का पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।
राजद के प्रतिनिधिमंडल में कई नेता रहे शामिल
बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में राजद के अनवर आलम, पूर्व विधायक एज्या यादव, प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन, चक्रपाणि हिमांशु, मदन शर्मा और निर्भय अंबेडकर शामिल रहे।
वहीं महिला आयोग की अध्यक्ष से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में मधु मंजरी, आभा लता, प्रो. गीता यादव, रबिया खातून, सुनीता कुशवाहा, विजय लक्ष्मी, प्रभावती देवी मांझी और अर्चना कुमारी शामिल थीं।
अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
तस्वीर साझा किए जाने के विवाद के बाद मामला राजनीतिक मांग से आगे कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद अब राजद मुख्यमंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
फिलहाल पूरे मामले में जांच और संबंधित एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर नजर है। इस मामले में सबसे अहम पहलू नाबालिग पीड़िता की पहचान और निजता की कानूनी सुरक्षा का है।
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