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जमुई जमीन घोटाला पर EOU का एक्शन: जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और उनके पति पर FIR, CO समेत 3 गिरफ्तार  

Published: Wed, 30 Sep 2026 07:28 PM (IST)

जमुई के सिकंदरा में जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और उनके पति गुड्डु यादव पर 10 एकड़ सरकारी कृषि भूमि की फर्जी रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. जमुई में जिला परिषद अध्यक्ष और पति पर जमीन धोखाधड़ी का आरोप।

  2. दस एकड़ सरकारी कृषि भूमि की फर्जी रजिस्ट्री का सनसनीखेज मामला।

  3. आर्थिक अपराध इकाई ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जांच जारी।

राज्य ब्यूरो, पटना। जमुई के सिकंदरा में जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और उनके पति भू-माफिया गुड्डु यादव पर कृषि फार्म की दस एकड़ सरकारी जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच में गुड्डु यादव एवं दुलारी देवी के स्वजनों और गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम पर 14 निबंधित दस्तावेज मिले हैं।

इसमें तीन दस्तावेज के माध्यम से अकेले दुलारी देवी के नाम पर ही सात एकड़ जमीन की खरीद सरकारी मूल्य से भी कम कीमत पर की गई है।

इस पूरे फर्जीवाड़े में सिकंदरा अंचल कार्यालय के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी छोटेलाल यादव, तत्कालीन अंचलाधिकारी विनोद कुमार चौधरी, तत्कालीन राजस्व पदाधिकारी निभा कुमारी और मुकेश कुमार वर्णवाल की मिलीभगत भी पाई गई है।

ईओयू के अनुसार, इनकी मदद से आठ जनवरी, 2019 को प्राप्त जमीन के 154 एवं 156 खेसरा का दाखिल-खारिज भी करवा लिया गया है।

हालांकि स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद शेष निबंधित दस्तावेजों के आधार पर किए गए दाखिल-खारिज को सभी स्तरों से अस्वीकृत कर दिया गया है।

ईओयू ने इस मामले में मंगलवार को आर्थिक अपराध इकाई थाने में गुड्डु यादव, उनकी पत्नी दुलारी देवी और गिरोह के अन्य सदसयों के साथ तत्कालीन अंचल अधिकारी, कर्मचारी एवं राजस्व अधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर छापामारी की।

इसमें प्राथमिक अभियुक्त सिकंदरा के तत्कालीन राजस्वकर्मी छोटेलाल यादव के साथ सिकंदरा के ही प्रदीप चौधरी और जवाहन प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया गया है।

ईओयू के अनुसार, जमीन के फर्जी तरीके से की गई खरीद-बिक्री में शामिल अन्य पदाधिकारियों एवं लोगों की भूमिका का सत्यापन कर उनके खिलाफ भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जमीन कब्जाने के लिए तैयार किया 1924 और 1927 के फर्जी कागजात

ईओयू के अनुसार, कृषि विभाग ने वर्ष 1959 में कृषि फार्म की जमीन को अधिग्रहित किया था। आरोप है कि गिरोह के सदस्यों ने अंचल कार्यालय के पदाधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर वर्ष 1924 और 1927 के फर्जी कागजात तैयार किए और सरकारी जमीन को अपने तथा गिरोह के सदस्यों के नाम पर क्रय कर दाखिल-खारिज करा लिया।

मुंगेर के अवर निबंधक और सिकंदरा के अंचलाधिकारी की ओर से भी इस संबंध में रिपोर्ट दी गई है, जिसमें 1924 और 1927 में तैयार कागजात को फर्जी बताया गया है।

इस मामले में 29 सितंबर को नया कांड दर्ज कर तत्कालीन अंचल अधिकारी, कर्मचारियों और राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू की गई है।

कमजोर की जमीन को कम कीमत पर खरीद ऊंचे दाम पर बेचता है गिरोह

ईओयू ने इसी साल जुलाई में गुड्डू यादव के गिरोह के ठिकानों पर छापेमारी कर फर्जी तरीके से जमीन खरीद-बिक्री करने का पर्दाफाश किया था। इस मामले में 27 जुलाई को आरोपितों के खिलाफ आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 14/26 भी दर्ज कर जांच की जा रही है।

जांच में सामने आया कि गुड्डू यादव और उनकी पत्नी दुलारी देवी अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर कमजोर और असहाय लोगों की जमीन को तीसरे व्यक्ति को खड़ा कर विवादित बनाते हैं। फिर इसे कम कीमत पर खरीदकर ऊंचे दाम पर बेच देते हैं।

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