पटना [अरविंद शर्मा]। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) की पहचान अराजक पार्टी के रूप में होती रही है। कोई नियम नहीं। कोई सिस्टम नहीं। शिष्टाचार से भी दूर। किंतु जगदानंद सिंह (Jagadanand Singh) के प्रदेश अध्यक्ष (State President) बनते ही सबकुछ अचानक बदल गया है। अनुशासन प्रिय जगदानंद सिंह ने सबसे पहले आरजेडी कार्यालय (RJD Office) की व्यवस्था दुरुस्त की है। पदाधिकारियों के आने, बैठने और जाने का समय तय कर दिया है। खुद के लिए भी नियम बना लिया है।

पहले नहीं था अनुशासन का कोई खास नियम

आरजेडी के प्रदेश कार्यालय की वर्तमान व्यवस्था एवं संस्कृति को समझने के लिए अतीत में झांकना जरूरी है। किसी के कहीं भी आने-जाने पर पाबंदी नहीं थी। किसी भी समय किसी के चैंबर में कोई बेधड़क प्रवेश कर सकता था। प्रदेश अध्यक्ष के चैंबर में जाने के लिए भी इजाजत की जरूरत नहीं होती थी। यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय में मौजूद नहीं होते थे तो उनकी कुर्सी पर भी कुछ लोग अधिकार पूर्वक कब्जा जमा लेते थे। एक-दो अवसरों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav) की कुर्सी पर उनके बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के बैठने की भी बड़ी चर्चा रही थी।

अब बदल गई पार्टी कार्यालय की तस्‍वीर

किंतु अब? जगदानंद ने सबसे पहले आने-जाने का समय सुधारा। खुद सुबह 11 बजे पहुंच जाते हैं और शाम साढ़े छह बजे तक डटे रहते हैं। मिलना-जुलना होता है। वरिष्ठ-कनिष्ठ नेताओं से मिलने का समय निर्धारित कर दिया गया है। झुंड में मुलाकात नहीं होगी। पहले प्रदेश अध्यक्ष के आते ही भीड़ इकट्ठी हो जाती थी। किंतु अब तस्वीर बदल गई है। मुलाकात चाहने वाले लोग पहले पर्ची भेजें। फिर बुलावे का इंतजार करें। जगदानंद मीडिया से भी मिलने का समय निर्धारित करने वाले हैं।

अब नहीं चलेगी अनावश्यक गप्पबाजी

संस्कृति भी सुधारी जा रही है। खुद के साथ-साथ पदाधिकारियों के लिए भी अनुशासन जरूरी है। मुलाकात सबसे होती है किंतु मिलने का सिस्टम है। आने वालों को अब चाय भी मिलती है। आप काम से आए हैं तो कीजिए और चुपके से निकल लीजिए। अनावश्यक रूप से बैठकर गप्प मत हांकिए।

वर्षों बाद हुई शुद्ध पानी की व्यवस्था

आरजेडी कार्यालय में पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था वर्षों बाद की गई है। आरओ था, किंतु वर्षों से खराब था। अब नया आरओ लगा दिया गया है। जहां-तहां बिखरे कूड़े-कचरे को हटा दिया गया है। अध्यक्ष के चैंबर में बेतरतीब रखी कुर्सियों को बाहर कर दिया गया है। अब सिर्फ चार कुर्सियां हैं। इसका मतलब कि एक बार में चार से अधिक लोगों को अंदर आने की अनुमति नहीं है।

Posted By: Amit Alok

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