पटना, जेएनएन। बिहार में उत्तर प्रदेश के एक असिस्टेंट कमिश्नर का फैमिली विवाद गरमा गया है। आइआरएस अफसर और बाल विकास विभाग में तैनात महिला अफसर की कथित दूसरी शादी को अवैध ठहराते हुए अफसर की पत्नी ने बिहार महिला आयोग में गुहार लगाई है। इसपर महिला आयोग ने एक्शन लिया है। दूसरी ओर महिला अधिकारी ने तमाम आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को बेवजह फंसाने की बात कही है। आइआरएस अधिकरी ने भी कहा है कि उनका पत्‍नी से तलाक का मुकदमा चल रहा है, जिसे सेटल करने के लिए पत्‍नी उनसे ड़ेढ़ करोड़ रुपये मांग रही है।
जानिए क्या है मामला---
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की रहने वाली अपर्णा त्रिपाठी का कहना है कि वे इलाहाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात इलाहाबाद के रहने वाले ज्ञानेंद्र त्रिपाठी से हुई। दोनों ने घर वालों की मर्जी से शादी कर ली। शादी के एक साल के बाद ज्ञानेंद्र का चयन 2010 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हो गया और वे आइआरएस अधिकारी बन गए।
पत्‍नी के अनुसार शादी के बाद सबकुछ ठीक था, लेकिन ज्ञानेंद्र के साथ कोचिंग करने वाली इलाहाबाद की एक महिला श्वेता मिश्रा जो बिहार में बीपीएससी की परीक्षा पास कर बाल विकास विभाग में अधिकारी हैं, से उनकी नजदीकियां बढ़ गईं। पीड़िता का आरोप है कि श्वेता ने कोचिंग के टीचर से ही शादी कर ली थी और एक बेटी भी है। लेकिन उसके बाद भी उसने ज्ञानेंद्र से झारखंड के एक मंदिर में शादी कर ली है।
आइआरएस अधिकारी की पत्‍नी अपर्णा का कहना है कि श्वेता चूंकि बिहार में तैनात हैं, इसीलिए उन्होंने बिहार राज्य महिला आयोग में शिकायत की है। उनके अनुसार उनपर अत्याचार हुआ है। पहले तो उनके पति ने श्वेता से शादी की, फिर उनके खिलाफ तलाक का मुकदमा दर्ज करा दिया।
अपर्णा के अनुसार श्‍वेता ने छुट्टी लेकर ज्ञानेंद्र से शादी की और जब पूछा गया तो उन्होंने विभाग को बताया कि वे उस दिन अॉफिस में काम कर रहीं थीं, फाइलें साइन की थीं। उनपर लगाए गए आरोप झूठे हैं। लेकिन विभाग से मिले कागजात से पता चला है कि वे छुट्टी पर बाहर गईं थीं। अपर्णा का कहना है कि उन्‍हें तलाक दिए बगैर उनके पति ने दूसरी औरत से शादी की है। अपर्णा ने दोनों की शादी की तस्वीरें भी पेश की हैं।
महिला आयोग ने लिया संज्ञान
बिहार राज्य महिला आयोग ने आइआरएस अधिकारी की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों पर महिला अफसर को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन वे नहीं आईं।
महिला आधिकारी ने खुद को बताया निर्दोष
आरोपों की बाबत महिला अधिकारी से बात की गई तो उन्‍होंने खुद को निर्दोष बताया। उन्‍होंने कहा कि उनपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। यह पति-पत्‍नी का आपसी विवाद है, जिससे उनका लेना-देना नहीं है। श्‍वेता मिश्रा के अनुसार उन्‍होंने आइआरएस अधिकारी से शादी नहीं की है। इस संबंध में उनपर पहले आरोप लगाए गए थे, जिसपर हाईकोर्ट उनके पक्ष में फैसला दे चुका है। उन्‍होंने बताया कि आइआरएस अधिकारी की पत्‍नी के खिलाफ वे मानहानि का मुकदमा भी जीत चुकी हैं।
आइआरएस अधिकारी बोले: मुकदमा सेटल करने के लिए पत्‍नी ने मांगे डेढ़ करोड़
इस संबंध में आइआरएस अधिकारी ज्ञानेद्र त्रिपाठी से भी संपर्क किया गया। उन्‍होंने कहा कि पत्‍नी से उनका तलाक का मुकदमा हरदोई पारिवारिक न्‍यायालय में लंबित है। पत्‍नी ने भी उनपर मुकदमा किया है। उनके अनुसार मुकदमे को सेटल करने के लिए उनकी पत्‍नी ने 1.5 करोड़ रुपये की भी मांग की है। उन्‍होंने बताया कि अभी तक उन्‍हें बिहार राज्‍य महिला आयोग का कोई नोटिस नहीं मिला है।

Posted By: Kajal Kumari