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IRCTC होटल केस की पूरी कहानी: लालू परिवार पर आरोप क्या हैं, जमीन से कैसे जुड़ा मामला और अब आगे क्या होगा?

Published: Thu, 10 Sep 2026 06:53 PM (IST)

IRCTC Money Laundering Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी ...और पढ़ें

IRCTC होटल केस आखिर है क्या

IRCTC होटल केस आखिर है क्या

HighLights

  1. IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में नौ आरोपियों पर आरोप तय।

  2. लालू, राबड़ी, तेजस्वी यादव समेत प्रमुख नाम शामिल हैं।

  3. सात आरोपियों को कोर्ट ने आरोपों से बरी कर दिया।

राधा कृष्ण, पटना। IRCTC Money Laundering Case: IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के 10 सितंबर 2026 के आदेश के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार की कानूनी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।

वहीं, सात आरोपियों को इस मामले में आरोपों से बरी कर दिया गया है। अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अगली तारीख 3 अक्टूबर 2026 तय की गई है।

लेकिन यह पूरा मामला शुरू कहां से हुआ? रेलवे के होटलों का टेंडर पटना की जमीन से कैसे जुड़ा और फिर इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल कैसे आया?

सबसे जरूरी सवाल यह भी कि आरोप तय होने के बाद लालू परिवार के सामने अब क्या कानूनी चुनौती है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।

पहले समझिए- IRCTC होटल केस आखिर है क्या?

यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, रांची और पुरी स्थित रेलवे के BNR होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं।

CBI का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इसी कथित लाभ के बदले पटना में जमीन के लेन-देन का रास्ता बना।

यानी पूरे मामले की मुख्य कड़ी तीन हिस्सों से जुड़ती है-रेलवे होटल का टेंडर, कथित लाभ और पटना की जमीन का लेन-देन।

पटना की जमीन इस केस में इतनी अहम क्यों है?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, होटल टेंडर से जुड़े कथित लाभ के बदले पटना की एक जमीन का लेन-देन हुआ। CBI ने आरोप लगाया कि जमीन पहले एक कंपनी के माध्यम से खरीदी गई और बाद में उसका प्रभावी नियंत्रण लालू परिवार से जुड़ी लारा प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा।

जांच एजेंसी ने जमीन के कथित बाजार मूल्य और जिस कीमत पर उसका लेन-देन हुआ, उसमें अंतर होने का भी आरोप लगाया है।

यही कथित जमीन लेन-देन आगे चलकर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच का अहम आधार बना। ED ने इसे अपराध से हुई आय यानी ‘Proceeds of Crime’ के एंगल से देखा।

मामले की शुरुआत कब हुई? 2004-05 तक जाती हैं जड़ें

इस केस की जड़ें 2004-05 के दौर तक जाती हैं। उस समय रेलवे के कुछ होटलों के प्रबंधन से संबंधित प्रक्रिया IRCTC को सौंपी गई थी। मई 2004 में लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री बने।

इसके बाद होटल संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी। CBI के मुताबिक, 2005-06 में इसी प्रक्रिया में कथित अनियमितता कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया।

हालांकि मामला कई वर्षों तक बाद की कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं बना। इसके बाद 2017 में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के साथ यह मामला फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।

2017 में CBI ने FIR की, फिर दाखिल हुई चार्जशीट

जुलाई 2017 में CBI ने मामले में FIR दर्ज की। इसमें लालू यादव और अन्य पर पद के कथित दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और होटल टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए गए।

जांच आगे बढ़ने के बाद अप्रैल 2018 में CBI ने चार्जशीट दाखिल की। इसमें लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

यहीं से मामले की कानूनी लड़ाई आगे बढ़ती गई और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच ED तक पहुंची।

ED की एंट्री से मामला मनी लॉन्ड्रिंग केस बना

CBI की FIR को आधार बनाकर ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की। अगस्त 2018 में ED ने PMLA के तहत इस मामले में चार्जशीट दाखिल की।

इसके बाद मामला केवल कथित टेंडर अनियमितता तक सीमित नहीं रहा। जांच का फोकस कथित तौर पर उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन और जमीन की संपत्ति पर भी गया।

यानी CBI जहां कथित टेंडर अनियमितता की जांच कर रही थी, वहीं ED ने यह जांचने की कोशिश की कि क्या उस कथित अपराध से हुई आय को संपत्ति या अन्य माध्यमों में लगाया गया।

10 सितंबर को कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 10 सितंबर 2026 को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।

आरोप तय किए गए आरोपियों में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, पीसी गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स, सुजाता होटल्स, विजय कोचर और विनय कोचर शामिल हैं।

अदालत ने प्रथमदृष्टया मामले में आगे मुकदमा चलाने का आधार माना। कोर्ट ने जांच को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताए जाने वाली दलील को भी स्वीकार नहीं किया।

सात आरोपियों को मिली राहत, कौन-कौन हुए डिस्चार्ज?

कोर्ट ने इस मामले में सात आरोपियों को आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया है। इनमें गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी और देवकी नंदन तुलस्यान शामिल हैं।

इसके अलावा राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपों से डिस्चार्ज किया गया है।

इसका सीधा मतलब है कि इस मामले में इन सात के खिलाफ आगे आरोपों के आधार पर कार्यवाही नहीं चलेगी, जबकि बाकी नौ आरोपियों के खिलाफ मामला आगे बढ़ेगा।

सबसे जरूरी बात: आरोप तय होना दोषी साबित होना नहीं है

कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने का मतलब यह नहीं है कि लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव या अन्य आरोपी दोषी साबित हो गए हैं। यह कानूनी प्रक्रिया का एक चरण है।

इसका अर्थ है कि अदालत ने प्रथमदृष्टया ऐसे आधार पाए हैं जिन पर मुकदमा आगे चलाया जा सकता है। अब अभियोजन पक्ष को अपने आरोप सबूतों और गवाहों के जरिए साबित करने होंगे।

इसके बाद बचाव पक्ष को भी आरोपों और सबूतों का जवाब देने का पूरा अधिकार होगा। अंतिम फैसला ट्रायल और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

अब लालू परिवार के सामने क्या कानूनी चुनौती है?

आरोप तय होने के बाद अब मामले की ट्रायल प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष दस्तावेज और गवाह पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष उन सबूतों को चुनौती दे सकेगा।

लालू परिवार के लिए मुख्य कानूनी चुनौती कथित होटल टेंडर, जमीन के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच संबंध को लेकर होगी। जांच एजेंसियों को अपने आरोप अदालत में साक्ष्यों के आधार पर साबित करने होंगे।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि मामले का नतीजा तय हो गया है। आरोप तय हुए हैं, दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

क्या IRCTC केस और Land-for-Jobs केस एक ही हैं?

नहीं। दोनों मामले अलग-अलग हैं। IRCTC केस रांची और पुरी के रेलवे होटलों के कथित टेंडर में अनियमितता और उससे जुड़े जमीन के लेन-देन पर केंद्रित है।

वहीं Land-for-Jobs मामले में रेलवे में नौकरी देने के बदले कथित तौर पर जमीन लेने के आरोप हैं। दोनों मामलों में लालू परिवार के सदस्यों के नाम सामने आने के कारण अक्सर इन्हें साथ चर्चा में लिया जाता है।

लेकिन कानूनी तौर पर IRCTC होटल केस और Land-for-Jobs केस अलग मामले हैं और दोनों की अपनी अलग जांच व न्यायिक प्रक्रिया है।

अब अगली सुनवाई कब और क्या होगा?

राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। आरोप तय होने के बाद अब केस ट्रायल के अगले चरण में जाएगा।

आने वाली कार्यवाही में अभियोजन और बचाव पक्ष अपनी-अपनी दलीलें और साक्ष्य अदालत के सामने रखेंगे। इसके बाद ही मामले की दिशा और आगे की कानूनी तस्वीर साफ होगी।

फिलहाल इस आदेश का सबसे सीधा मतलब यही है-लालू परिवार के खिलाफ IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में मुकदमा आगे बढ़ेगा, जबकि सात आरोपियों को इस मामले में राहत मिल गई है।

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