चीफ जस्टिस के नाम पर फोन कराने के मामले में IPS आदित्य कुमार को झटका, 6 महीने में जांच का निर्देश
IPS अधिकारी आदित्य कुमार को तत्कालीन डीजीपी को चीफ जस्टिस के नाम पर फोन कराने के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक ...और पढ़ें

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने सुनाया फैसला। फाइल
HighLights
IPS आदित्य कुमार को कैट से राहत नहीं मिली।
डीजीपी को चीफ जस्टिस के नाम पर फोन का मामला।
विभागीय जांच छह महीने में पूरी करने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, पटना। तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पर फोन काॅल कराकर दबाव डालने के मामले में IPS अधिकारी आदित्य कुमार को राहत नहीं मिली है।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की पटना पीठ ने इस मामले में आदित्य कुमार के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को रद करने से इनकार कर दिया है।
छह महीने के भीतर जांच पूर्ण करने का निर्देश
कैट ने राज्य सरकार को विभागीय जांच में तेजी लाते हुए छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान अधिकारी को बचाव का उचित अवसर दिया जाए और उनकी ओर से असहयोग की स्थिति में भी जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाए।
न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जोहरी और प्रशासनिक सदस्य कुमार राजेश चंद्र की पीठ ने कहा कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही लंबित होने के बावजूद, सरकार अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत कदाचार के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकती है।
ईओयू ने 2022 में दर्ज किया था मामला
आदित्य कुमार ने 25 मार्च 2025 को जारी विभागीय आरोपपत्र को चुनौती देते हुए इसे रद करने और अपने कनिष्ठ अधिकारियों के समान डीआईजी पद पर प्रोन्नति पर विचार करने की मांग की थी।
आदित्य कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) में 2022 में मामला दर्ज होने के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। अधिकारी ने आरोपपत्र जारी करने में देरी और दुर्भावना का हवाला दिया था।
लापरवाही के आरोप में चल रही कार्रवाई हुई थी समाप्त
गौरतलब है कि गृह विभाग ने 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनके विरुद्ध चल रही विभागीय कार्यवाही को पिछले सप्ताह समाप्त कर दिया था।
इसके बाद उनके डीआइजी बनने का रास्ता भी लगभग साफ हो गया था। विभाग की आरक्षी शाखा ने बीते शुक्रवार को इससे जुड़ा संकल्प जारी कर दिया। वर्तमान में आदित्य कुमार बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14 के समादेष्टा हैं।
चार साल पहले का था मामला
यह मामला करीब चार साल पुराना है, जब आदित्य कुमार गया के एसएसपी थे। उस समय पर उनपर शराब बरामदगी के मामले को हल्के में लेने, अधीनस्थ थाना के पदाधिकारियों पर नियंत्रण का घोर अभाव और समय-समय पर थानों का निरीक्षण जैसी जिम्मेदारी के पालन में कोताही बरतने के आरोप लगे थे।
इस मामले में आदित्य कुमार ने आरोप-पत्र एवं जांच रिपोर्ट को निरस्त करने को लेकर कैट की पटना पीठ में अपील की थी।
इसमें अगस्त माह में आदित्य कुमार के विरुद्ध जांच रिपोर्ट को निरस्त समझते हुए पात्र पाए जाने पर डीआइजी के पद पर प्रोन्नति प्रदान करने करने को कहा गया है।
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