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Chakbandi in Bihar: बिहार में आइआइटी के साॅफ्टवेयर से होगी चकबंदी, कैमूर जिले के गांव से पायलट प्रोजेक्‍ट की शुरुआत

चकबंदी को आधुनिक तरीके से पूरा करने के लिए बिहार सरकार रूड़की आइआइटी के साथ कर रही है करार चार साल में हो जाएगी चकबंदी आधुनिक तकनीक के सहारे मुश्किल दूर करने की कोशिश मंत्री की इजाजत मिली कैबिनेट में जाएगा प्रस्ताव

By Shubh Narayan PathakEdited By: Published: Wed, 14 Apr 2021 09:31 AM (IST)Updated: Wed, 14 Apr 2021 09:31 AM (IST)
Chakbandi in Bihar: बिहार में आइआइटी के साॅफ्टवेयर से होगी चकबंदी, कैमूर जिले के गांव से पायलट प्रोजेक्‍ट की शुरुआत
बिहार सरकार कर रही चकबंदी की तैयारी। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पटना, राज्य ब्यूरो। Chakbandi in Bihar: भूमि सर्वेक्षण के बाद सरकार चकबंदी के लिए अभियान चलाने जा रही है। आइआइटी रुड़की को इसका जिम्मा दिया गया है। उसने सॉफ्टवेयर विकसित कर लिया है। नाम है-चक बिहार। दावा है कि इसके जरिए हर साल 12 हजार गांवों की चकबंदी होगी। राज्य में 45 हजार एक सौ तीन राजस्व गांव है। योजना ढंग से चली तो चार साल में लक्ष्य हासिल हो जाएगा। आइआइटी रुड़की और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के चकबंदी निदेशालय के बीच होने वाले करार के मसौदे को विभागीय मंत्री रामसूरत कुमार ने मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की इजाजत मिलते ही आइआइटी की टीम काम में जुट जाएगी। मंत्री ने बताया कि चकबंदी के बाद किसी भी उद्योगपति को जमीन और उसके मालिक की जानकारी मिल जाएगी।

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म्‍यूटेशन सहित राजस्‍व के सभी कार्यों में होगी आसानी

म्यूटेशन सहित राजस्व के सारे काम इसी के जरिए संपादित होंगे। भू-अर्जन में भी आंकड़े जुटाने में सरकार को सहूलियत होगी। चकबन्दी पूरा होने के बाद उद्योग धंधो को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही चकबन्दी निदेशालय का अपना वेबसाईट होगा, जिस पर बिहार के हरेक गांव के जमीन मालिकों का नाम और उनके द्वारा धारित जमीन का ब्यौरा उपलब्ध होगा। माउस के एक क्लिक के जरिए कोई भी व्यक्ति यह जान पायेगा कि किसी गांव में एक चक का रकवा कितना है। उसका मालिक कौन है।

इनसेट

सिर्फ 20 प्रतिशत ही रह जाएगा मानवीय हस्तक्षेप

इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से चकबंदी में मानवीय हस्तक्षेप महज 20 प्रतिशत रहेगा। 80 प्रतिशत काम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से होगा। इस समय सौ प्रतिशत काम अमीन और दूसरे कर्मचारी करते हैं। गड़बड़ी की शिकायत मिलती है। हिंसक घटनाएं भी होती हैं।

दो सौ दक्ष तकनीकी कर्मी आइआइटी की टीम में

चकबंदी के लिए आइआइटी की टीम में दो सौ दक्ष तकनीकी कर्मी हैं। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह टीम धरातल पर उतर जाएगी। उनके लिए चकबंदी निदेशालय में लैब का निर्माण किया जाएगा।

कैमूर के कम्हारी गांव में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

आइआइटी को कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल के कनैरा कम्हारी गांव पायलट प्रोजेक्ट के रुप में दिया गया है। 70 के दशक में रोहतास जिले में रिविजनल सर्वे हुआ। 80 के दशक में चकबंदी भी शुरू हुआ। चकबंदी निदेशालय ने सर्वे और चकबंदी के खतियान और नक्शा को रुड़की भेजा। वहां दोनों को डिजिटाइज किया गया। फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद चक काटा गया। विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह के सामने इसका प्रजेंटेंशन दिया गया।

एडवाइजरी में जन प्रतिनिधि

चकबन्दी अधिनियम की धारा- 15 में संशोधन किया गया है। इसके लागू होने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता को चकबंदी के बाद बने चकों पर दखल-कब्जा दिलाने के काम में शामिल किया जाएगा। पहले गांव की एडवाइजरी कमिटी का गठन चकबन्दी पदाधिकारी करते थे। संशोधन के बाद पंचायतों के चुने हुए जन प्रतिनिधि एडवाइजरी कमिटी के पदेन सदस्य होंगे।


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