पटना [राज्य ब्यूरो]। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड को ले सोमवार को बिहार विधानसभा में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष, खासकर राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्‍यों ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से इस्‍तीफा मांगा। हालांकि, विधानसभा अध्‍यक्ष ने स्थिति स्‍पष्‍ट की, लेकिन विपक्ष मानने के लिए तैयार नहीं दिखा।

हंगामा पर विस अध्‍यक्ष ने पूछा ये सवाल, स्‍पष्‍ट की स्थिति

सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजद विधायकों ने कहा कि कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ सीबीआइ जांच का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री इस्तीफा दें। विधानसभा अध्यक्ष ने पूछा कि कहां लिया है पॉक्सो कोर्ट ने संज्ञान? सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन को फारवर्ड भर किया है। यह नियम है कि अगर कोई आरोपी आवेदन देता है तो उसे संबंधित जगह पर भेज दिया जाता है। इसमें सरकार को क्या करना है? लेकिन विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करता रहा।

अंदर वेल में की नारेबाजी, बाहर परिसर में दिया धरना

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा वस्तुस्थिति स्पष्ट किए जाने पर भी विपक्ष नहीं शांत हुआ। वेल में नारेबाजी होने लगी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने भोजनावकाश तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया। इसके बाद विपक्षी सदस्य परिसर में धरने पर बैठ गए।

सदन की बैठक शुरू होते ही राजद के ललित यादव और भाई वीरेंद्र खड़े हो गए। वे हंगामा कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी का कहना था कि मुजफ्फरपुर स्थित  पॉक्सो कोर्ट ने मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी तरह का कोई संज्ञान नहीं लिया। सामान्य प्रक्रिया के तहत पॉक्सो कोर्ट ने सीबीआइ को एक आवेदन स्थानांतरित किया।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद संपूर्ण विपक्ष विधानमंडल परिसर में कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा स्थल के समीप धरने पर बैठ गया। कुछ देर के बाद धरना खत्म हो गया।

विधान परिषद में भी 10 मिनट तक हंगामा

विधानसभा की पहली पाली आरंभ होने के पूर्व राजद के विधायकों ने विधानसभा परिसर में इस प्रकरण पर पोस्टर के साथ नारेबाजी की। महिला विधायकों ने इस प्रदर्शन का मोर्चा संभाला हुआ था। इसी सवाल पर विधान परिषद में भी राजद सदस्यों ने करीब 10 मिनट तक हंगामा किया।

मंत्री ने कहा, सबूत है तो सीबीआइ के पास जाए विपक्ष

कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा और राजद के रामचंद्र पूर्वे की मांग पर  संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार  ने कहा कि कोई प्रमाण है तो सीबीआइ के समक्ष जाएं। जांच का अनुश्रवण सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जा रहा है। हंगामा के बजाय सर्वोच्च न्यायालय में इंटरवेनर बन सकते हैं। ऐसा नहीं कर सदन का महत्वपूर्ण समय बर्बाद करना उचित नहीं है। 

Posted By: Amit Alok

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