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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बिहार की यूनिवर्सिटी के सिलेबस में होगा बदलाव, तैयारी शुरू; कौन-कौन से विषय होंगे शामिल?

Published: Sun, 04 Aug 2024 05:34 PM (IST)

बिहार के विश्वविद्यालयों के सिलेबस अपग्रेड होंगे। शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। एक उच्चस्तरीय समिति गठित की ...और पढ़ें

कई पुराने विषय को हटाकर जोड़े जाएंगे नए। फाइल फोटो
कई पुराने विषय को हटाकर जोड़े जाएंगे नए। फाइल फोटो

HighLights

  1. शिक्षा विभाग के द्वारा एक उच्चस्तरीय समिति गठित
  2. विषयों को लेकर सभी कुलपतियों से मांगी गई रिपोर्ट
  3. 20 साल पुराने पाठ्यक्रम की समीक्षा कर देगी रिपोर्ट

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रम अपग्रेड होंगे। कई पुराने विषय हटाए जाएंगे और नए जोड़े जाएंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। विभाग के अनुसार पाठ्यक्रम के कई विषयों में अब छात्र-छात्राओं की रुचि नहीं रही।

ऐसे विषयों को लेकर सभी कुलपतियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर समिति तय करेगी कि कौन-कौन विषय अनुपयोगी हैं। पाठ्यक्रम में पर्यटन, फिजियोथेरेपी, योग, आपदा प्रबंधन एवं पारा मेडिकल आदि विषय जोड़े जा सकते हैं।

समिति में तीन कुलपति 

विभागीय सचिव वैद्यनाथ यादव ने पाठ्यक्रम की समीक्षा और उसमें बदलाव के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। उसमें पाटलिपुत्र, जयप्रकाश व बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति क्रमश: प्रो. आरके सिंह, प्रो. प्रमेन्द्र कुमार बाजपेयी व प्रो. बिमलेन्दु शेखर झा सम्मिलित हैं। यह समिति 20 वर्ष पुराने व्यावसायिक पाठ्यक्रम की समीक्षा कर रिपोर्ट देगी। 

पाठ्यक्रम में ये विषय होंगे सम्मिलित

एक उच्च अधिकारी ने बताया कि स्नातक एवं स्नातकोत्तर संकाय स्तर पर एलाइड सब्जेक्ट (संबद्ध विषय) के रूप में माइक्रोबायोलाजी, बायोटेक्नोलाजी, बायो-केमिस्ट्री, एप्लाइड मैथमेटिक्स, इंडस्ट्रियल मैथ, इंजीनियरिंग मैथ, इंवायरमेंटल केमिस्ट्री (पर्यावरण रसायन) और फार्मा केमिस्ट्री शुरू करने का प्रस्ताव है।

अभी दर्शन शास्त्र, ग्रामीण अर्थशास्त्र, बांग्ला, उर्दू, मैथिली, वनस्पति शास्त्र जैसे पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या नहीं के बराबर है। नए सत्र 2024-28 में संबंधित विषयों में नामांकन के लिए विश्वविद्यालयों को पांच बार तिथि बढ़ानी पड़ी है। फिर भी छात्रों की संख्या संतोषप्रद नहीं रही।

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