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Gorakhpur-Siliguri Expressway: 520 किमी का एक्सप्रेसवे बदलेगा बिहार की तस्वीर, 'चिकन नेक' से कामाख्या तक आसान होगा सफर

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:58 AM (IST)

gorakhpur siliguri expressway गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना उत्तर बिहार को पूर्वोत्तर से जोड़ेगी, जिससे सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी। यह ...और पढ़ें

गोरखपुर-सिलीगुड़ी परियोजना

 गोरखपुर-सिलीगुड़ी परियोजना

HighLights

  1. 520 किमी गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा बिहार से।

  2. उत्तर बिहार को पूर्वोत्तर से जोड़ेगा, यात्रा और व्यापार सुगम।

  3. डीपीआर और प्रारंभिक सर्वेक्षण जारी, आर्थिक विकास की उम्मीद।

डिजिटल डेस्क, पटना। उत्तर बिहार से पूर्वोत्तर तक सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी परियोजना आने वाले समय में बड़ा बदलाव ला सकती है। करीब 520 किमी लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरने की बात कही जा रही है। केंद्र सरकार के अनुसार, इस परियोजना के लिए डीपीआर और प्रारंभिक सर्वेक्षण का काम दिया जा चुका है।

सीता की धरती से कामाख्या के द्वार तक कनेक्टिविटी

इस सड़क की खासियत सिर्फ दूरी घटाना नहीं, बल्कि उत्तर बिहार को पूर्वोत्तर से जोड़ना भी है। प्रस्तावित रूट सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे मिथिला क्षेत्र से होकर सीमांचल की तरफ बढ़ेगा। आगे सिलीगुड़ी के रास्ते असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

मधुबनी से सिलीगुड़ी, फिर असम की ओर सीधा रास्ता

मधुबनी और आसपास के इलाकों के लिए यह कॉरिडोर खास महत्व रख सकता है। मौजूदा सड़क नेटवर्क के मुकाबले बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिलने पर सिलीगुड़ी की ओर आवाजाही सुगम हो सकती है। इसी रास्ते से आगे असम पहुंचने का विकल्प भी मजबूत होगा।

‘चिकन नेक’ के पास पहुंचेगी बिहार की सड़क रफ्तार

सिलीगुड़ी का इलाका पूर्वोत्तर भारत के लिए बेहद अहम कनेक्टिविटी प्वाइंट है। प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली परियोजनाओं में शामिल है। यही वजह है कि इसे रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिहार के इन जिलों से गुजरने की योजना

प्रस्तावित रूट के अनुसार बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज क्षेत्र इससे जुड़ सकते हैं।

इसके बाद कॉरिडोर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा। इस तरह उत्तर बिहार के कई जिलों को सीधे सिलीगुड़ी क्षेत्र से जोड़ने का रास्ता तैयार होगा।

सड़क आएगी तो कारोबार भी बढ़ेगा

एक्सप्रेसवे बनने से सिर्फ सफर आसान होने की उम्मीद नहीं है। जिन इलाकों से यह गुजरेगा, वहां लॉजिस्टिक्स, परिवहन, होटल, ढाबे, सर्विस सेंटर और दूसरे स्थानीय कारोबार के लिए नए अवसर बन सकते हैं। कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी बेहतर सड़क संपर्क मददगार हो सकता है।

120 की रफ्तार और 10 घंटे का सफर कितना सच?

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को लेकर 120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड और मधुबनी से कामाख्या तक करीब 10 घंटे के सफर जैसे दावे चर्चा में हैं।

हालांकि परियोजना अभी डीपीआर/सर्वेक्षण चरण में होने के कारण अंतिम रूट, डिजाइन, प्रवेश-बिंदु और वास्तविक यात्रा समय परियोजना के आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट होंगे।

बिहार के लिए क्यों अहम है यह कॉरिडोर?

गोरखपुर-सिलीगुड़ी परियोजना उत्तर बिहार को पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।

अगर प्रस्तावित कनेक्टिविटी तय रूप में विकसित होती है, तो मिथिला और सीमांचल से सिलीगुड़ी होते हुए पूर्वोत्तर तक सड़क सफर का पूरा नक्शा बदल सकता है।

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