पटना [काजल]। देश में हर रोज लड़कियों के साथ हो रही अमानवीय व्यवहार की घटनाएं इस बात का सुबूत हैं कि चांद-सितारों तक पहुंच चुके लेकिन आज भी हम कैसे समाज में रहते हैं? जिसकी सोच का दायरा लड़कियों के लिए हैवानियत से भरा है। अपनी मां-बहन, बेटी, बहू को छोड़कर दूसरों की बेटी की खुली देह को बुरी नजर से घूरने और उन्हें ऊपर से नीचे तक निहारने की जैसे खुली छूट मिली हो। 

इतना तक तो ठीक है, लेकिन इससे बढ़कर पशुओं की तरह व्यवहार और उनकी हत्या कर देना विकसित समाज की परिभाषा में कहां तक फिट बैठता है। छोटी-छोटी बच्चियों से की गई क्रूरता क्या किसी भी धर्म-संप्रदाय या किसी भी समाज के लिए सही है? यह सुनकर जरूर हमारी नसें फूल जाती हैं, हम क्रोधित होते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाता है, फिर एक नई घटना तक के लिए। 

एक निर्भया कांड, फिर कठुआ रेप कांड, सूरत कांड....कितने कांड की गिनती करें, कुछ कांड तो हमें पता भी नहीं चल पाते क्योंकि वो मीडिया की खबरों में शामिल नहीं हो पाते, थाने में इनकी शिकायत तक दर्ज नहीं होती, वो जो गुमनाम लड़कियां अपना जीवन यूं ही खत्म कर देती हैं, उनका क्या? उनके लिए तो कोई आंसू भी नहीं बहाता। 

भारत अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रहा

एक दैनिक अखबार में छपी खबर के मुताबिक उत्तरप्रदेश के उन्नाव और जम्मू कश्मीर के कठुआ रेप केस ने लोगों का ध्यान खींचा है कि भारत अब महिलाओं के लिए सुरक्षित देश नहीं रह गया है। 2016 की बात करें तो 3.38 लाख केस महिलाओं के साथ हुए अपराध के खिलाफ दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 11.5% दुष्कर्म के केस हैं। जिससे पता चलता है कि हर एक घंटे में देश में 39 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं होती हैं, जिनमें से चार रेप केस में एक पर ही कानूनी कार्रवाई होती है, बाकी केसेज एेसे ही निपटा दिए जाते हैं। यह कितना दुखद है।

बिहार में भी हर रोज घटती हैं एेसी घटनाएं 

बिहार की बात करें तो हर दिन यहां भी मानवता को शर्मसार करने वाली एेसी घटनाएं रोज घटती हैं, जिनमें से इन घटनाओं की शिकार लड़कियां होती हैं और वो भी निम्न-मध्यमवर्गीय तबके की होती हैं जिनकी कोई सुनने वाला नहीं होता। इन मामलों में कार्रवाई और कानून एेसा है जिससे आरोपित को सजा तुरत नहीं मिल पाती। 

कुछ ही मामलों मे होती है कार्रवाई

बिहार में भी ये घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे लोगों के बीच आक्रोश है। लेकिन क्या आक्रोश होना ही इस समस्या का समाधान है? क्या उन लड़कियों की गलती बस इतनी है कि वो लड़कियां हैं। इन मामलों में पुलिस का ढीला-ढाला रवैया और धीमी न्यायिक प्रक्रिया की वजह से ये मामले लोगों के दिलो दिमाग से हट जाते हैं और कार्रवाई हुई है या नहीं, ये भी किसी को मालूम नहीं चलता। 

इन घटनाओं में एफआइआर, मेडिकल और उसमें भी लापरवाही..कार्रवाई नहीं हो पाना, क्या उन मृतक लड़कियों के साथ न्याय हो पता है? या जो जीवित रह गईं वो अबोध बच्चियां क्या अपने शरीर के साथ हुए घिनौने कृत्य को भूल पाती होंगीं। अगर उनके परिवार ने साथ दिया और वो आर्थिक रूप से मजबूत हुआ तो ठीक, नहीं तो वो बेटियां न्याय पाने के लिए भटकती रह जाती हैं।

पिछले सप्ताह बिहार में हुईं ये घटनाएं

हाजीपुर में पांच साल की लड़की से दुष्कर्म

सोमवार को वैशाली जिले के महनार थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म, दो पर नामजद एफआईआर, हाजीपुर सदर अस्पताल में बच्ची को लाया गया, जहां उसका मेडिकल कराया गया।

सासाराम में छह साल की लड़की को बनाया शिकार

वहीं, सासाराम के करगहर थाना इलाके में एक युवक ने छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। रेप का शिकार हुई बच्ची को उसके परिजनों ने इलाज के लिये सासाराम के सदर अस्पताल में लाया जहां उसका इलाज चल रहा है। परिजनों ने इस मामले के आरोपी को पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया था।  

सीवान में आठ साल की दिव्यांग लड़की से किया कुकर्म

सीवान के गोरेयाकोठी के छितौली खुर्द गांव में आठ साल की दिव्यांग बच्ची से पड़ोस के एक युवक ने शनिवार की शाम को दुष्कर्म किया। बच्ची को गंभीर हालत में सीवान सदर अस्पताल लाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने दर्द से कराहती बच्ची का इलाज करने से इनकार कर दिया। परिजनों से कहा कि पहले एफआईआर करा कर लाइए।

सात घंटे बाद डीएम के हस्तक्षेप पर डॉक्टरों ने बच्ची का इलाज किया गया। बच्ची की मां ने बताया कि वह डाॅक्टर के पास चेकअप के लिए गई थी और बच्ची घर पर अकेली खेल रही थी। इसी दौरान गांव का ही एक युवक आबिद घर में घुस गया और लड़की के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची तीसरी कक्षा की छात्रा है। 

मुजफ्फरपुर में नौवीं की छात्रा से गैंगरेप

मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी थाना क्षेत्र से किडनैप कर गैंगरेप की शिकार नौवीं की छात्रा को पुलिस ने छुड़ाया। आरोपियों ने ट्रक के केबिन में उसके साथ रातभर गैंगरेप किया। पुलिस ने शक के आधार पर बाइक से जा रहे तीन लोगों को रोका, जिनमें से एक भागने में कामयाब रहा, जबकि दो लोग पकड़े गए।

गैंगरेप की शिकार नौवीं की छात्रा गुरुवार को दुकान से सामान लेने गई थी। उसी दौरान चार लोगों ने उसे अॉटो के अंदर खींच लिया। शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी दी।

मेमो के अभाव में सदर से लौटा दी गई पीड़िता

पुलिस छात्रा को पुलिस हेडक्वार्टर गोरौल ले गई, जहां से उसे हाजीपुर सदर हॉस्पिटल रेफर किया गया। गौरोल पुलिस ने कुढ़नी पुलिस को सूचना दी। कुढ़नी पुलिस की लेट-लतीफी के कारण कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। पुलिस पीड़िता को सदर हॉस्पिटल लेकर आई थी। मेमो न होने के कारण उसका न तो मेडिकल हो सका और न ही उसका इलाज। उसे बैरंग वापस कर दिया गया।

बाद में कुढ़नी पुलिस गोरौल पहुंची। बच्ची और आरोपियों को कुढ़नी पुलिस के हवाले कर दिया गया। गैंगरेप की शिकार छात्रा की मां ने गुमशुदगी के दिन ही मुजफ्फरपुर के कुढ़नी थाना में किडनैपिंग का केस दर्ज करवाया था।

पटना में नाबालिग से चार लोगों ने किया कुकर्म

वहीं नालंदा की रहने वाली लड़की जो पटना आकर भटक गई थी उसका फायदा उठाते हुए उसके साथ  चार लोगों ने दुष्कर्म किया। लड़की ने पुलिस को बताया कि वह कोढ़वां स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन जाने के लिए देर रात पटना जंक्शन पहुंची थी। इसी दौरान जीपीओ के पास मोनू ने उसे देख लिया और उसका पीछा करने लगा। मोनू और छोटू जबरन उसे जीपीओ के पास स्थित अपनी दुकान में ले गये।

पीड़िता जब विरोध करने लगी तो दोनों ने उसी के दुपट्टे से उसका मुंह बांध दिया। उसने बताया कि इस दौरान मोनू ने फोन कर अपने और दो दोस्तों को बुला लिया। मोनू और छोटू ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। पीड़िता लगातार चिल्ला रही थी। इसी बीच पास से गुजर रहे कोतवाली थाने की पुलिस आवाज सुनी और दो आरोपियों को पकड़ लिया जबकि दो आरोपी भागने में सफल रहे। 

मोतिहारी में दुष्कर्म के बाद हत्या

वहीं, मोतिहारी में गैंगरेप के बाद एक लड़की की हत्या करने का मामला सामने आया है। रेप और हत्या का आरोप इलाके के एक मुखिया बेटे पर लगा है। जानकारी के मुताबिक उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया और विरोध करने पर युवती की हत्या कर दी।

जानकारी के मुताबिक घटना को उस समय अंजाम दिया गया जब युवती शौच के लिए गई हुई थी। घटना जिले के सुगौली के सपहा गांव की है। पीड़िता के परिवार के मुताबिक पूर्व से चले आ रहे जमीनी विवाद में इस घटना को अंजाम दिया गया है।

कठुआ गैंगरेप

कठुआ की आठ साल की बच्ची जिसका 10 जनवरी को अपहरण कर लिया गया था। बच्ची को एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उसे भूखा रखा गया और नशीली दवाइयां दी गईं और बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसके बाद बच्ची की हत्या कर दी गई। बच्ची का शव 17 जनवरी को रसाना गांव के जंगल से मिला था।

सूरत में 11 साल की लड़की की रेप के बाद हत्या 

कठुआ के बलात्कार मामले के बाद अब गुजरात के सूरत में एक 11 वर्षीय लड़की के बलात्कार के बाद हत्या का मामला सामने आया है और अबतक पुलिस न पीड़ित बच्ची की पहचान कर पाई है और ना ही आरोपियों की।

इसके बाद मथुरा एक्सप्रेस वे में एक युवती के साथ बंद गाड़ी में किया गया दुष्कर्म। वह चीखती-चिल्लाती रही लेकिन दरिंदों को उसपर दया नहीं आई।

इन सभी घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया, अखबार और आपसी चर्चा जोर-शोर से हो रही है। कैंडिल मार्च, विरोध प्रदर्शन और कुछ लोग तो इन घटनाओं में भी धर्म और संप्रदाय की बात कहने से नहीं हिचकते। क्योंकि हम यह भूल जाते हैं कि वो भी किसी की बेटी, बहन और खेलने-कूदने वाली बच्ची रही होगी।

ये बच्चियां रेप शब्द के अर्थ से भी वाकिफ नहीं होंगी। गुड़िया गुड्डों से खेलने की उम्र में इस समाज ने उन्हें एेसा दर्द दिया कि वो या तो मर गईं या जो बचीं भीं वो ताउम्र उस घटना को याद कर सिहर उठती होंगी। आखिर कहां सुरक्षित हैं हमारी बेटियां? कुछ दिनों का मातम मनाया जाता है, फिर लंबी कार्रवाई चलती है। क्या मर्द समाज अपनी सोच नहीं बदल सकता? क्या बेटी होना गुनाह है? बेटी होने की सजा आखिर कब तक.....ये बड़ा सवाल है।

By Kajal Kumari