पटना [अमित आलोक]। Mahatma Gandhi Death Anniversary: मोहनदास करमचंद गांधी (M.K. Gandhi) के महात्‍मा (Mahatma) से राष्‍ट्रपिता (Father of the Nation) बनने तक के सफर में बिहार के चंपारण सत्‍याग्रह (Champaran Satyagrah) का महत्‍वपूर्ण स्‍थान रहा है। यहीं पड़े अहिंसक आंदोलन के बीज से वह तूफान आया, जिसने ब्रिटिश शासन की चूलें हिला दीं। लेकिन 15 अगस्‍त 1947 को मिली आजादी (Independence) के बाद गांधी अधिक दिनों तक जिंदा नहीं रह सके। आज ही के दिन 1948 में वे एक धर्मांध नाथूराम गोडसे (Nathu Ram Gadse) की गोलियों के शिकार हो गए थे।

गांधी के त्याग-बलिदान व विचारों पर न केवल किताबें लिख्‍ी गईं, बल्कि फिल्‍में भी बनीं। वे बॉलीवुड (Bollywood) के हॉट सब्‍जेक्‍ट बने ही, रिचर्ड एटनबरो (Richard Attenborough) की फिल्म 'गांधी' (Gandhi) से हॉलीवुड (Hollywood) में भी छा गए। गांधी के जीवन का शायद ही कोई पहलु हो, जिसपर फिल्‍म नहीं बनी हो। महात्‍मा गांधी को जानना-समझना है तो ये फिल्‍में भी बड़ी मददगार हैं।

गांधी: सरल शब्‍दों में बताया राष्‍ट्रपिता का जीवन

महात्‍मा गांधी के जीवन पर बॉलीवुड ही नहीं, हॉलीवुड की भी नजर गई। उनके जीवन पर रिचर्ड एटनबरो ने साल 1982 में फिल्म 'गांधी' (Gandhi) बनाकर धूम मचा दी। इसमें हॉलीवुड एक्टर बेन किंस्ले (Ben Kingsley) ने गांधी का किरदार निभाया। गांधी के जीवन पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में शुमार ऑस्‍कर (Oscar) विजेता इस फिल्‍म ने दुनिया को सरल शब्‍दों में गांधी के जीवन व दर्शन से अवगत कराया।

द मेकिंग ऑफ गांधी: गांधी का महात्‍मा तक का सफर

सवाल उठता है कि मोहनदास करमचंद गांधी का महात्‍मा बनने का सफर कैसा रहा? वे महात्‍मा गांधी कैसे बने? साल 1996 में रिलीज श्याम बेनेगल (Shyam Benegal) की फिल्म 'द मेकिंग ऑफ गांधी' (The Making of Gandhi) इसका जवाब देती है। इसमें मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा बनने का सफर दिखाया गया है। इसमें रजत कपूर (Rajat Kapoor) ने महात्‍मा गांधी का रोल किया है।

लगे रहो मुन्नाभाई: देखिए गांधी की अहिंसा वाली गांधीगिरी

गांधी अहिंसक स्‍वतंत्रता आंदोलन के पर्याय बन गए। करीब 19 साल पहले साल 2006 में रिलीज फिल्‍म 'लगे रहो मुन्नाभाई' (Lage Raho Munnabhai) गांधी की अहिंसा को 'गांधीगिरी' के रूप में रोचके ढ़ंग से दिखाती है। राजकुमार हिरानी (Rajkumar Hirani) द्वारा निर्मित इस फिल्म में संजय दत्त (Sanjay Dutt) ने महात्मा गांधी का किरदार निभाया है।

समकालीन नेताओं से वैचारिक मतभेद दिखातीं ये फिल्‍में

गांधी भारतीय स्‍वतंत्रता आदेालन में एक विचार बन गए। स्‍वतंत्रता आंदोलन के दौरान समकालीन नेताओं से उनके वैचारिक मतभेद भी रहे। कुछ फिल्‍में इनपर भी फोकस करती हैं।

गांधी और सरदार पटेल के विचारों में मतभेद को रेखांकित करती साल 1993 की फिल्म 'सरदार' (Sardar) दोनों के रिश्तों को समझने का अवसर देती है। फिल्म अन्नू कपूर (Annu Kapur) ने गांधी का तो परेश रावल (Paresh Rawal) ने सरदार पटेल (Sardar Patel) का किरदार निभाया है।

महात्‍मा गांधी का डॉ. भीमराव बाबासाहब अंबेडकर (Dr. Bhim Rao Ambedker) से कुछ मुद्दों पर मतभेद रहे। साल 2000 की फिल्‍म 'डॉ. बाबा साहब अंबेडकर' (Dr. Baba Saheb Ambedker) दोनों के रिश्तों को समझाती है। इसमें महात्‍मा गांधी का किरदार मोहन गोखले (Mohan Gokhele) ने निभाया है।

इसी तरह साल 2000 की ही राजकुमार संतोषी (Raj Kumar Santoshi) की फिल्‍म 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' (The Legend of Bhagat Singh) भगत सिंह (Bhagat Singh) के गांधी जी से प्रेरित होने तथा आगे वैचारिक मतभेद होने पर अलग होने की कहानी को दिखाया गया है। इसमें गांधी की भूमिका सुरेंद्र रंजन (Surendra Ranjan) ने निभाई है।

गांधी माइ फादर: जीवन के दुखद प्रसंगों पर फोकस करती फिल्‍म

महात्‍मा गांधी के कई समकालीन नेताओं से वैचारिक मतभेद के अलावा उनके पारिवारिक जीवन पर भी फिल्‍म बनी। फिरोज अब्बास मस्तान (Firoz Abbas Mastan) के निर्देशन में बनी तथा साल 2007 में रिलीज राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्‍म 'गांधी माइ फादर' (Gandhi My Father) में महात्मा गांधी व उनके बेटे हरिलाल (Harilal) के बिगड़े रिश्ते को दिखाया गया है। फिल्म गांधीजी के जीवन के दुखद प्रसंगों पर फोकस करती है, जिसमें गांधी का किरदार दर्शन जरीवाला ने निभाया है।

हत्‍या की परिस्थितियां जाननी हो तो देखिए 'हे राम'

भारत की स्‍वतंत्रता में महात्‍मा गांधी के आंदोलन का की हत्‍या के पीछे भारत विभाजन के दौरान की परिस्थितियां रहीं। भारत विभाजन और गांधी की हत्या को पृष्ठभूमि में रखकर बनी 'हे राम' (Her Ram) फिल्म साल 2000 में रिलीज हुई। कमल हसन (Kamal Hassan) द्वारा बनाई गई इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह (Nasiruddin Shah) ने महात्मा गांधी का किरदार निभाया।

...और इन फिल्‍मों में हत्‍या के बाद की कहानियां

गांधी की हत्‍या के बाद की कहानियां भी फिल्‍मों में दिखती हैं। साल 2010 की फिल्‍म 'रोड टू संगम' (Road to Sangam) हाल के वर्षों में महात्‍मा गांधी पर बनी बड़ी चर्चित फिल्‍म है। फिल्‍म में एक मुस्लिम कार मैकेनिक को एक पुरानी कार की मरम्‍मत की जिम्मेदारी दी गई है। मैकेनिक नही जानता है कि इसी कार से महात्मा गांधी की अस्थियां त्रिवेणी संगम में प्रवाहित करने के लिए ले जाई गईं थी। साल 2010 में रिलीज एक मुस्लिम कार मैकेनिक की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म के निर्देशक अमित राय (Amit Rai) थे।

गोडसे से गांधी की हत्या की थी, लेकिन एक फिल्‍म ऐसी भी आई, जिसमें एक व्‍यक्ति को यह वहम हो जातमा है कि उसने गांधीजी को मारा है। साल 2005 में जहनु बरूआ (Jahanu Barua) द्वारा बनाई गई फिल्‍म 'मैनें गांधी को नहीं मारा' (Maine Gandhi Ko Nahi Mara) का विषयवस्‍तु यही है। इसमें गांधी को मारने का वहम वाले वयक्ति के किरदार में अनुपम खेर (Anupam Kher) का अभिनय सशक्‍त है।

Posted By: Amit Alok

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