नालंदा, जेएनएन। डेंगू, चिकिनगुनिया, मलेरिया, मस्तिष्क ज्वर जैसे रोगों के कारक मच्छरों की रोकथाम को नालंदा नगर निगम ने दोहरे आक्रमण की योजना बनाई है। एक ओर निगम वर्षा ऋतु के बाद लार्वा मारने के लिए दवा का छिड़काव कराएगा तो दूसरी ओर एक विशेष प्रकार की मछली को तालाब, नालों तथा जल संग्रह वाले स्थानों पालेगा। मंगलवार को गंबुजिया नामक इस विशेष मछली की पहली खेप शहर पहुंच गई है।

3-4 इंच लंबी होती है गंबुजिया मछली

दिल्ली, मद्रास जैसे दूसरे तमाम महानगरों में मच्छरों को मारने के लिए गंबुजिया मछली का प्रयोग किया जा रहा है। यह मछली मच्छर तथा उसके लार्वा पर हमला करती है। 3-4 इंच लंबी इस मछली की मच्छरों के प्रति भूख इसे दूसरी मछलियों से अलग करती है। इसकी सक्रियता के सामने मच्छर बेबस नजर आते हैं। एक ओर इससे मच्छर बच नहीं पाते तो दूसरी ओर बेस्वाद होने के कारण यह मछली खाने योग्य नहीं मानी जाती है। 

करीब एक लाख मछली मंगवाने की योजना

मंगलवार को सैंपल के रूप में करीब दो सौ गंबुजिया मछली नालंदा के मोहनपुर स्थित मत्स्यजीवी से मंगाई गई हैं। करीब एक लाख मछली मंगवाने की नगर निगम की योजना है। अभी इसकी कीमत तय नहीं है लेकिन डेढ़ से दो रुपये प्रति मछली कीमत होने की संभावना है।

नगर आयुक्त सौरभ जोरबाल ने कहा कि दो-तीन दिन में मछली की पहली खेप आ जाएगी। यदि मछली का प्रभाव दिखा तो बंगाल से बड़ी संख्या में मछली मंगवाई जाएंगी। इस मछली के प्रभाव से ही कोलकाता में डेंगू तथा चिकिनगुनिया का प्रभाव शून्य है।

बच्चे को देती है जन्म

इस मछली की सबसे बड़ी खासियत बिजली की फुर्ती और अंडे की जगह बच्चे देना है। एक व्यस्क मछली साल में करीब डेढ़ सौ बच्चों को जन्म देती है।  ऐसे में तालाबों में एक बार पनपने के बाद इसकी वृद्धि स्वत: होती जाएगी।  एक एकड़ के तालाब में करीब तीन हजार मछलियों की जरूरत होती है।

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