पटना । राज्य में 11 मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास तीन माह के अंदर किया जाएगा। इसके लिए काफी जोरशोर से तैयारी चल रही है। बिहार देश में सबसे तेजी से प्रगति करने वाला राज्य है। वर्तमान में जिस तेजी से राज्य विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है, उतनी तेजी पहले कभी नहीं रही। ये बातें गुरुवार को राजधानी के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) के 5वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लालजी टंडन ने कहीं। समारोह में 138 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई। इस अवसर पर नए नर्सिग कॉलेज का उद्घाटन भी राज्यपाल ने किया।

: खोजपरक हो चिकित्सा व्यवस्था :

राज्यपाल ने कहा कि भारत की चिकित्सा व्यवस्था खोजपरक होनी चाहिए। यहां पढ़े-लिखे डॉक्टर विदेशों में जाकर शोध करते हैं और बड़ा नाम कमाते हैं। अगर यहां पर शोध को महत्व दिया जाए तो चिकित्सकों का बड़ा नाम हो सकता है।

: नए परिधान में मना दीक्षांत समारोह :

आइजीआइएमएस का पांचवां दीक्षांत समारोह नए परिधान में मनाया गया। पहली बार संस्थान के शिक्षक व छात्र समारोह में कुर्ता-पायजामा एवं पगड़ी में आए थे। इस परिधान में राज्यपाल, स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव भी थे। राज्यपाल ने कहा कि यह परिधान साबित करता है कि हम भारतीय हैं और अपनी परंपराओं से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि आज जो पगड़ी हमलोग पहने हुए हैं, वही पगड़ी महान शिक्षाविद् मदन मोहन मालवीय जी धारण करते थे।

: देश का महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान बनेगा आइजीआइएमएस :

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि आइजीआइएमएस तेजी से विकास पथ पर बढ़ रहा है। यहां पर अबतक 46 किडनी प्रत्यारोपण ऑपरेशन हो चुके हैं। 250 से अधिक मरीजों का कॉर्निया प्रत्यारोपण हुआ है। जल्द ही हार्ट एवं लिवर प्रत्यारोपण की तैयारी है। इस तरह की अत्याधुनिक सुविधाओं की बहाली से संस्थान देश के गिने-चुने अस्पतालों में शामिल हो जाएगा। यहां पर वर्तमान में न केवल बिहार से बल्कि कई पड़ोसी राज्यों के अलावा नेपाल एवं भूटान से भी मरीज आकर इलाज करा रहे हैं। इसके अलावा राज्य में 54 एएनएम एवं 28 जीएनएम प्रशिक्षण संस्थान खोले जाएंगे।

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: ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी :

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की भारी कमी है। राज्य की 88 फीसद आबादी ग्रामीण इलाके में रहती है लेकिन उन इलाके में मात्र 2 फीसद चिकित्सक अपनी सेवा दे रहे हैं। जबकि शहरों में मात्र 12 फीसद आबादी को 98 फीसद चिकित्सक अपनी सेवा दे रहे हैं। यह विषमता पाटने की जरूरत है। राज्य सरकार अब गांवों में भी लोगों को हर तरह की सुविधा मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि आइजीआइएमएस को 2500 बेड का अस्पताल बनाने की तैयारी चल रही है। इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डॉ. एनआर बिश्वास ने अतिथियों का स्वागत किया।

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Posted By: Jagran

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