साइकिल खरीदने के लिए पिता ने बेच दिया खेत, तंगी में वह भी गई; फिर सिवान की गुड़िया को मिली 2.5 लाख की सौगात
सिवान की 19 वर्षीय गुड़िया कुमारी, एक राजमिस्त्री की बेटी, राष्ट्रीय स्तर पर साइकिलिंग में बिहार का नाम रोशन कर ...और पढ़ें

साइकिल से सफलता की कहानी लिख रही गुड़िया। सौ-स्वयं
जागरण संवाददाता, पटना। दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो मंजिल दूर नहीं होती। इस वाक्य को सच साबित कर रही हैं सिवान 19 वर्षीय खिलाड़ी गुड़िया कुमारी।
पंजाब में राजमिस्त्री की 19 वर्षीय बेटी साइकिलिंग के ट्रैक पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का डंका बजा रही है। कभी पिता की साइकिल से अपनी पहली रेस जीतने वाली गुड़िया से प्रेरणा लेकर आज कई बालिकाएं साइकिल दौड़ाने लगी हैं।
गुड़िया की यात्रा की शुरुआत 14 वर्ष की उम्र में तब हुई थी, जब गांव में परिवर्तन नामक संस्था ने एक साइकिल रेस का आयोजन किया।
रेस में पांच हजार रुपये की बालिका साइकिल का इनाम था। उस वक्त गुड़िया ने स्कूल जाने वाली पिता दिनेश सिंह की पुरुष साइकिल से ही रेस में हिस्सा लिया और पहला स्थान प्राप्त कर साइकिल जीत ली।
शुरुआत में गांव वालों के तानों के डर से पिता ने उन्हें रोकना चाहा, लेकिन लोगों के समझाने पर वे राजी हो गए। बेटी के लिए पिता ने और बड़ा निर्णय लिया।
उसके जुनून को देखते हुए पिता ने अपना खेत बेचकर 2022 में उसे एक लाख रुपये की साइकिल खरीद कर दी।
आर्थिक तंगी से बेच दी साइकिल
गुड़िया बताती हैं कि सफर आसान नहीं था। उचित ट्रेनिंग और आर्थिक मदद के अभाव में उन्होंने 2023 में पिता की दिलाई एक लाख रुपये की साइकिल बेच दी, हालांकि वे खेल से ज्यादा दिन दूर नहीं रहीं।
दिसंबर 2024 में पटना में लगे एक शिविर के दौरान साइकिलिंग एसोसिएशन आफ बिहार के सचिव डाॅ. कौशल किशोर सिंह और श्याम झा की नजर उन पर पड़ी।
उन्होंने गुड़िया की आर्थिक मदद की, साइकिल दी और उन्हें दोबारा ट्रैक पर उतारा। गुड़िया बताती हैं कुछ मौके ऐसे भी आए जब आर्थिक स्थित ठीक नही रही, तब डाॅ. कौशल और श्याम उनके खेल को निखारने के लिए रूम का रेंट तक दिया।
सरकार ने दी ढाई लाख रुपये की साइकिल
ढाई साल बाद वापसी करते हुए गुड़िया ने शानदार प्रदर्शन किया। ओडिशा में आयोजित ओपन नेशनल (दिसंबर 2026) में उन्होंने टीम गेम में कांस्य और रांची में हुए नेशनल में वह चौथे स्थान पर रहीं।
अस्मिता खेलो इंडिया (ईस्ट जोन) की विभिन्न प्रतियोगिताओं में गुड़िया अब तक चार स्वर्ण और इतने ही रजत पदक राज्य के नाम कर चुकी हैं।
आज गुड़िया के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें अभ्यास के लिए ढाई लाख रुपये की आधुनिक साइकिल दी है।
फिलहाल वह पटना के गांधी मैदान के पास किराए के मकान में रहकर रोजाना सुबह पांच बजे से जेपी गंगापथ पर 100 किलोमीटर साइकिल चलाने का कड़ा अभ्यास करती हैं।
10वीं की परीक्षा देने की तैयारी कर रही गुड़िया की कामयाबी देखकर, अब सिवान की कई अन्य लड़कियां भी प्रेरणा लेकर साइकिलिंग के क्षेत्र में आगे आ रही हैं।
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