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बेगूसराय के किसान पिता की बेटी ने भारोत्तोलन में दिखाया दम, शालिनी की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी

Published: Sat, 10 Oct 2026 03:52 PM (IST)

बेगूसराय की शालिनी कुमारी ने भारोत्तोलन में 100 से अधिक पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई है, अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना है।

माता-प‍िता के साथ और पदकों की माला पहने शाल‍िनी। सौ-स्‍वजन

माता-प‍िता के साथ और पदकों की माला पहने शाल‍िनी। सौ-स्‍वजन

HighLights

  1. शालिनी कुमारी ने भारोत्तोलन में 100 से अधिक पदक जीते।

  2. राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक लक्ष्य।

  3. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बेगूसराय की बेटी का संघर्ष जारी।

मो. खालिद, बेगूसराय। आमतौर पर लड़कियों को भारोत्तोलन जैसे ताकत वाले खेलों से दूर रखने की सोच के बीच शाम्हो प्रखंड के सरलाही गांव की शालिनी कुमारी ने अपनी मेहनत से अलग पहचान बनाई है।

किसान पिता सोनू सिंह और गृहणी माता मधु देवी की बेटी शालिनी का दावा है कि वह अब तक सौ से अधिक पदक जीत चुकी हैं।

जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं से आगे बढ़ते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनका सपना अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना है।

स्कूल की प्रतियोगिता से शुरू हुआ सफर

शालिनी की खेल यात्रा वर्ष 2019 में शुरू हुई। उस समय उन्हें भारोत्तोलन के बारे में अधिक जानकारी भी नहीं थी। स्कूल में आयोजित प्रतियोगिता में खेल शिक्षक ने उन्हें भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

पहली ही प्रतियोगिता में उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद प्रशिक्षक भूपति गौतम के मार्गदर्शन में उनका चयन राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ।

वहां पदक जीतने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अवसर मिला। धीरे-धीरे भारोत्तोलन के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया और मेहनत रंग लाने लगी।

प्रशिक्षण छूटा, सात-आठ महीने तक झेलीं परेशानियां

शालिनी के अनुसार, राजगीर खेल परिसर में प्रशिक्षण के दौरान विवाद और शिकायत के बाद उन्हें केंद्र छोड़ना पड़ा। उनका आरोप है कि इसके बाद करीब सात-आठ महीने तक नियमित प्रशिक्षण बाधित रहा।

इस दौरान वह तनाव में रहीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे अभ्यास कहां करें। आखिरकार वह बेगूसराय लौटीं और रतनपुर स्थित एक जिम में फिर से प्रशिक्षण शुरू किया। यहां वह करीब एक महीने से अभ्यास कर रही हैं।

पिता किसान, खेल पर हर महीने हजारों का खर्च

एक भाई और एक बहन शालिनी के लिए आर्थिक तंगी सबसे बड़ी चुनौती है। उनके अनुसार, पौष्टिक आहार, पूरक आहार और खेल उपकरणों पर हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च आता है।

पिता की सीमित आमदनी में इस खर्च को पूरा करना मुश्किल है। शालिनी का कहना है कि उन्हें कहीं से पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है। संसाधनों की कमी के कारण उनका भविष्य और प्रशिक्षण दोनों चिंता का विषय बने हुए हैं।

दूसरी लड़कियों के लिए प्रेरणा, अब अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण का लक्ष्य

स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा शालिनी चाहती हैं कि उनकी तरह दूसरी लड़कियां भी पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर खेलों में अपनी पहचान बनाएं। उनके अनुसार, उन्हें देखकर कई अन्य लड़कियां भी भारोत्तोलन से जुड़ी हैं।

वह कहती हैं कि यदि उन्हें उचित सहयोग और नियमित प्रशिक्षण मिले, तो वह और बेहतर परिणाम दे सकती हैं। उनका सपना अपने राज्य के साथ देश का नाम रोशन करना है।

संघर्षों के बीच अभ्यास जारी रखने का उनका संकल्प बताता है कि प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए केवल हौसले की नहीं, बल्कि सही अवसर और सहयोग की भी जरूरत होती है।