पटना में बाढ़ का पानी घटने के बाद प्रशासन अलर्ट, फसल क्षति और खराब हुई सड़कों का आकलन शुरू
पटना में बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नई चुनौतियाँ सामने आई हैं, जिसके मद्देनजर प्रशासन ने राहत कार्यों का दूसरा चरण शुरू कर दिया है।

पटना में बाढ़ का पानी घटने के बाद प्रशासन अलर्ट (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
प्रशासन ने राहत कार्यों का दूसरा चरण शुरू किया है।
फसल क्षति और क्षतिग्रस्त सड़कों का आकलन जारी है।
संक्रामक रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा।
जागरण संवाददाता, पटना। बाढ़ का पानी तेजी से उतर रहा है। कई जगह पर यह खतरे के निशान से नीचे तक आ गया, लेकिन संकट अब सामने है। गंगा, पुनपुन, दरधा और सोन के जलस्तर में कमी के साथ राहत शिविरों से लोगों की घर वापसी शुरू हो गई है। अधिसंख्य शिविर बंद किए जा चुके हैं लेकिन घर लौट रहे परिवारों के सामने अब अलग तरह की मुश्किलें हैं।
घरों में घुसे पानी ने जो तबाही मचाई थी, उसके निशान अब भी हैं। घर व मवेशियों के रहने की जगह तहस-नहस है। चारा व खाद्यान्न खराब हो चुके हैं। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और जलजमाव वाले इलाकों में मिट्टी-बालू, कीचड़ व गंदगी का अंबार है। कुल मिलाकर नदियों का पानी भले उतर गया लेकिन बाढ़ की मार जो दर्द दे गई है, वह जस का तस है।
इस वर्ष गंगा ने गांधी घाट पर बाढ़ के उच्चतम जलस्तर का नया रिकार्ड बनाया है। लंबे समय तक गंगा व पुनपुन का पाली उच्चतम बाढ़ स्तर के आसपास या खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका ज्यादा बताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन ने राहत कार्यों का दूसरा चरण शुरू कर दिया है।
अब राहत शिविर नहीं, घर-गांव संभालने की चुनौती
पानी घटने के बाद प्रभावित परिवार घर लौटने लगे हैं लेकिन कई परिवारों के लिए घर वापसी राहत से ज्यादा पुनर्व्यवस्था की शुरुआत है। घरों में जमा कीचड़, बालू और गंदगी निकालनी पड़ रही है। बाढ़ में खराब हुए अनाज, कपड़े और घरेलू सामान को हटाना, मवेशियों के लिए सुरक्षित जगह और चारे की व्यवस्था बड़ी चुनौती है।
जहां जलजमाव रहा है, वहां सफाई के साथ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित बस्तियों में सफाई, आवागमन बहाल करने और जरूरी सेवाओं को सामान्य करने की है।
अब प्रशासन को गांव-गांव जाकर यह देखना होगा कि पानी उतरने के बाद किसी परिवार की मुश्किल राहत व्यवस्था खत्म होने बाद बढ़ तो नहीं गई है।
क्षतिग्रस्त सड़कों की बनेगी सूची, फिर होगी मरम्मत
बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त सड़कों और संपर्क मार्गों को चिह्नित करने का काम शुरू हो रहा है। पानी पूरी तरह उतरने के बाद क्षति का आकलन कर मरम्मत कराई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राहत शिविरों से लौटे परिवारों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और पंचायत स्तर की सेवाओं तक फिर पहुंच बनानी है।
इसके अलावा नदियों के जलस्तर में लगातार कमी के बावजूद प्रशासन संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बनाए हुए है। नदी का पानी घटने के दौरान तटबंधों, सड़कों और कमजोर स्थानों की स्थिति भी जांची जा रही है।
फसल बर्बाद, अब होगा वास्तिवक नुकसान का आकलन
बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक रहने से खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। खेतों से पानी उतरने के बाद फसल क्षति का आकलन बड़ी चुनौती होगी। इसके बाद प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता और अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे और वास्तविक क्षति का आकलन कर रहे हैं।
बाढ़ के बाद की 10 बड़ी चुनौतियां
- पानी उतरने के बाद घरों-गलियों में जमा गंदगी की सफाई सबसे बड़ी चुनौती है।
- जलजमाव वाले इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य निगरानी जरूरी।
- कहां सड़क धंसी, कहां कटाव हुआ और कहां संपर्क टूट गया, इसका सर्वे कर आवागमन बहाल करना होगा।
- बाढ़ में चारा और पशु रखने की जगह खराब होने से लौटे परिवारों के सामने पशुधन बचाने की चुनौती है।
- खेतों से पानी उतरने के बाद वास्तविक फसल नुकसान का सर्वे कर किसानों तक सहायता पहुंचानी होगी।
- कई परिवारों की जमा खाद्य सामग्री, कपड़े और जरूरी सामान पानी में खराब हुआ है। घर बसाने के लिए तत्काल जरूरतों की पूर्ति जरूरी होगी।
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चापाकल और स्थानीय जलस्रोत प्रभावित हुए हों तो उनकी सफाई व सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करनी होगी।
- पानी उतरने के बाद तटबंध, रिंग बांध, पुलिया और नदी किनारे के कमजोर हिस्सों की जांच कर जरूरी मरम्मत करनी होगी।
- राहत शिविर बंद होने के बाद यह सुनिश्चित करना होगा कि लौटे परिवारों के पास रहने, खाने और जरूरी सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था हो।
- संवेदनशील स्थानों पर निगरानी जारी रखना ताकि अचानक बढ़ाव या कटाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके।
नदियों का पानी उतरने के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों की सफाई, इंसानों व मवेशियों को होने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम, सुगम यातायात के लिए क्षतिग्रस्त सड़कों-पुलियों की मरम्मत, पशु चारा, फसल क्षति, अनुग्रह राशि की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिविर से घर वापस जाने वालों की निगरानी की जा रही है ताकि विषय परिस्थितियों का तत्काल समाधान किया जा सके। -डीपी शाही, एडीएम आपदा
यह भी पढ़ें- Bihar Weather Update: बिहार में अगले 2 से 3 दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर, 18 जिलों में अलर्ट जारी
