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गंगा-पुनपुन के उफान से 10 हजार हेक्टेयर में फसलें जलमग्न, खेतों से पानी निकलने के बाद होगा नुकसान का आकलन

Published: Fri, 11 Sep 2026 09:18 AM (GMT+05:30)

गंगा और पुनपुन नदियों में आई बाढ़ से पटना जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर फसलें जलमग्न हो गई हैं। ...और पढ़ें

10 हजार हेक्टेयर में फसलें जलमग्न

10 हजार हेक्टेयर में फसलें जलमग्न

HighLights

  1. गंगा-पुनपुन की बाढ़ से 10 हजार हेक्टेयर फसलें जलमग्न।

  2. पानी उतरने के बाद होगा वास्तविक नुकसान का आकलन।

  3. किसानों को मिलेगी सहायता राशि और अगली फसल के बीज।

जागरण संवाददाता, पटना। गंगा-पुनपुन समेत कई नदियों में आई बाढ़ ने खेतों में खड़ी फसलों को चपेट में लिया है। प्राथमिक आकलन के अनुसार जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर में लगी फसलें जलमग्न हैं। खेतों में पानी भरा होने के कारण कृषि विभाग अभी नुकसान का वास्तविक आंकड़ा नहीं जुटा पाया है। 

चार से पांच दिन में पानी उतरने के बाद फसलों की क्षति का सही आकलन संभव होगा। पुनपुन क्षेत्र में धान व मक्का और दानापुर में सब्जियों की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

11 प्रखंडों में फसलें प्रभावित

जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश शंकर ने बताया कि बाढ़ प्रभावित 11 प्रखंडों में फसलें प्रभावित हुई हैं। इनमें पुनपुन, दानापुर, मोकामा, दनियावां, अथमलगोला, मनेर, फतुहा, नौबतपुर, धनरुआ, पालीगंज और पंडारक शामिल हैं। खेतों से पानी निकलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने क्षेत्र में फसल पूरी तरह बर्बाद हुई है।

फसल क्षति के बाद किसानों को सरकार सहायता राशि देगी। जिला कृषि पदाधिकारी के अनुसार, सिंचित भूमि पर फसल क्षति के लिए 17,500 रुपये और असिंचित भूमि के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रविधान है। 

22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता राशि

बहुवर्षीय फसल गन्ना आदि के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता राशि दी जाएगी। अधिकतम दो हेक्टेयर तक सहायता दी जाती है। हालांकि, कृषि पदाधिकारी ने कहा कि ये पुरानी दरें हैं। मुख्यालय स्तर पर नई दर को लेकर जल्द निर्णय होने की संभावना है।

बाढ़ में फसल गंवाने वाले किसानों को अगली फसल के लिए भी सहायता देने की तैयारी है। कृषि विभाग, ऐसे किसानों को मूली, फूलगोभी, पत्तागोभी, सरसों, तोरई और कुल्थी जैसी अपेक्षाकृत कम समय में तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।

जिले के 12 प्रखंड ऐसे हैं, जहां बाढ़ का दुष्प्रभाव नहीं पड़ा है। इन क्षेत्रों में पिछले वर्षों की तुलना में फसल की स्थिति बेहतर बताई जा रही है। कृषि पदाधिकारी के अनुसार, बाढ़ का पानी दियारा की जमीन पर गाद की नई परत छोड़ता है, जिससे उसकी उर्वरता बढ़ जाती है।

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