पटना। राजधानी में सितंबर के अंत में हुए भीषण जलजमाव के बाद पटना नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक गुरुवार को बांकीपुर अंचल कार्यालय में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता मेयर सीता साहू ने की। बैठक में पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद रामकृपाल यादव और कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र के विधायक अरुण कुमार सिन्हा भी शामिल हुए। करीब छह घंटे तक चली इस बैठक में 31 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नगर आयुक्त अमित कुमार पांडेय ने बताया कि सशक्त स्थायी समिति की मांग पर शुक्रवार को जलजमाव को लेकर विशेष बैठक की जाएगी।

बैठक के दौरान सांसद ने कहा कि छह सालों से बोर्ड की बैठक में शामिल होने के लिए कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई। जलजमाव के दौरान जनता ने हमे बहुत कोसा और गालियां भी दीं। जनता टैक्स देती है तो उसका बोलना वाजिब है। हम सबके समेकित प्रयास से समस्याएं दूर होंगी। हंगामा करने से बेहतर है कि सदन में मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया जाए। उसपर चर्चा हो और हम मिलकर योजनाओं को पूरा कराएं। जिस समय भी निगम को मेरी आवश्यकता होगी, मैं हमेशा उपलब्ध रहूंगा। वहीं, विधायकों में केवल अरुण कुमार सिन्हा शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के लिए काम कर रही है। योजनाएं सभी वार्डो को ध्यान में रखकर लाई जाएं।

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स्थायी समिति के सदस्यों पर जमकर बरसे पार्षद :

बैठक के दौरान छठे प्रस्ताव को लेकर पार्षदों और सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के बीच जमकर बहस हुई। जब नगर आयुक्त ने पटना नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आधारभूत संरचना के तहत नाली-गली, पक्की सड़क, ट्यूबवेल के निर्माण तथा स्मार्ट पार्किंग व पटन देवी मंदिर का सौंदर्यीकरण के लिए प्रशासनिक व पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति देने के संबंध में छठे प्रस्ताव पर बात चर्चा की तो पार्षद संजीत कुमार बबलू ने सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने आयुक्त से पूछा कि ये काम किस वार्ड में होंगे और इसका भुगतान किस मद से किया जाएगा? क्योंकि, मुख्यमंत्री नाली-गली और पक्की सड़क बनाने के लिए राशि दूसरे मद से आती है तो फिर आधारभूत संरचना जोड़कर नगर निगम क्यों रुपये खर्च कर रहा है? इस पर स्थायी समिति के सदस्य जवाब देने लगे तो सभी पार्षद नाराज हो गए। पार्षदों ने कहा कि स्थायी समिति के सदस्य गलत तरीके से अपने वार्ड की योजनाओं की स्वीकृति करवा लेते हैं।

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भेदभाव के आरोप पर महिलाओं ने मेयर को घेरा :

बहस के बीच महिला पार्षद हाथ में पैंफलेट लेकर खड़ी हो गई। इस पर लिखा था- 'जलजमाव पर चर्चा करो, उसकी निंदा करो'। महिला पार्षद पिंकी कुमारी, पिंकी यादव, तरुणा राय समेत अन्य ने कहा कि मेयर भेदभाव करती हैं। स्थायी समिति के सदस्यों के क्षेत्र की योजनाओं को मंजूरी मिल जाती है और उनके वार्ड में काम नहीं कराया जाता है। महिला पार्षद प्रस्ताव को अस्वीकृत करने पर अड़ी थीं। वे अपनी कुर्सियों से उठकर आई और मेयर को घेर लिया। डिप्टी मेयर मीरा कुमार और स्थायी समिति के सदस्य उन्हें समझाने लगे, लेकिन मामला बढ़ता चला गया। तब सांसद और विधायक ने मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि विकास का काम रुकना नहीं चाहिए। जिन वार्डो की योजना नहीं बनी है, उनके पार्षदों को मौका दिया जाए। वे अगली बैठक में उन वार्डो की योजनाओं को स्वीकृति दिलाएं। इसके बाद महिला पार्षद अपनी कुर्सियों पर बैठ गई और छठा प्रस्ताव पारित कर दिया गया। करीब आधे घंटे तक सदन की कार्यवाही रुक गई।

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: काम नहीं करते अधिकारी, सुनते हैं हम :

बैठक में स्थायी समिति के सदस्य सह पार्षद आशीष सिन्हा ने कहा कि निगम के अधिकारी बेलगाम हैं। वे काम नहीं करते और जनता के सवालों के जवाब हमे देने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि 35 सौ से अधिक गलियों का चयन सात निश्चय योजना के तहत किया गया है। कार्यपालक अभियंता फाइलों को सही तरीके से संबंधित अधिकारी, समिति अथवा बोर्ड तक नहीं पहुंचाते। इसके कारण कार्य शुरू होने में देरी होती है।

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: मेयर पुत्र और पार्षद पति किए गए हॉल से बाहर :

हर बार की तरह बैठक शुरू होते ही मेयर पुत्र शिशिर कुमार और महिला पार्षदों के पतियों ने अपनी-अपनी कुर्सी थाम ली थीं। लेकिन, उन्हें बाहर निकाल दिया गया। पार्षदों ने इसका विरोध किया तो नगर आयुक्त ने उन्होंने प्रोटोकॉल की जानकारी दी और नियमों का पालन करने को कहा। इसके बाद सभी बाहर चले गए, फिर सदन की कार्यवाही शुरू हुई।

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: अंचल कार्यालयों में पार्षदों के लिए बनेंगे कमरे :

रोड कटिंग के मुद्दे पर पार्षदों ने इससे संबंधित नियमों को सार्वजनिक करने की मांग की। पार्षदों ने बताया कि बिना अनुमति लिए जहां-तहां रोड काटे जाने के कारण वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। ऐसी ही बहस ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के मुद्दे पर भी हुई। ठोस कचरा प्रबंधन पर नगर आयुक्त ने बताया कि अंचलों में स्थापित स्टेशनों को जल्द चालू कराया जाएगा। अंचल कार्यालयों में पार्षदों के लिए भी एक कमरा होगा। निर्माण कार्यो सही ढंग से हो, इसके लिए वार्ड संख्या 70 के पार्षद विनोद कुमार ने कार्यो की समीक्षा के बाद ठेकेदार को पूरी राशि का भुगतान करने की सलाह दी। आउटसोर्सिग पर मजदूरों को रखने के मुद्दे पर पार्षदों में सहमति नहीं बनी। वार्ड पार्षद संजीत कुमार बबलू ने कहा कि नगर निगम अगर खुद बहाल करेगा तो लोगों को रोजगार मिलने के साथ रुपयों की भी बचत होगी।

Posted By: Jagran

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