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UPSC-BPSC से NEET-JEE तक EWS छात्रों को फीस में मिलेगी राहत? बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने उठाई बड़ी मांग

Published: Wed, 04 Nov 2026 09:24 AM (IST)

बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं ...और पढ़ें

डॉ. संतोष कुमार सुमन, लघु जल संसाधन मंत्री

डॉ. संतोष कुमार सुमन, लघु जल संसाधन मंत्री

HighLights

  1. मंत्री संतोष सुमन ने EWS छात्रों को वित्तीय सहायता मांगी।

  2. प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन शुल्क में छूट की वकालत।

  3. उच्च शिक्षा, IIT, मेडिकल के लिए छात्रवृत्ति की मांग।

डिजिटल डेस्क, पटना। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के विद्यार्थियों के लिए बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने बड़ी मांग उठाई है। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।

जिस तरह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के पात्र विद्यार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत छात्रवृत्ति और फीस में रियायत मिलती है, उसी तरह आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी व्यापक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

बिहार के लघु जल संसाधन मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया है कि EWS विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में आर्थिक सहायता की समग्र नीति बनाई जाए। उनकी मांग में UPSC, BPSC, SSC से लेकर NEET और JEE तक की आवेदन फीस में छूट शामिल है।

UPSC-BPSC की तैयारी में पैसा नहीं बनेगा बाधा, आवेदन फीस में छूट की मांग

मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर मिलना चाहिए। कई प्रतिभाशाली छात्र केवल आर्थिक परेशानी के कारण आवेदन शुल्क और तैयारी से जुड़े खर्चों का बोझ नहीं उठा पाते हैं।

उन्होंने UPSC, BPSC और SSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ NEET और JEE के आवेदन शुल्क में भी EWS अभ्यर्थियों को रियायत देने की मांग की है। उनका मानना है कि आर्थिक स्थिति के कारण किसी योग्य छात्र को परीक्षा में शामिल होने से वंचित नहीं होना चाहिए।

कॉलेज में दाखिले से लेकर ट्यूशन फीस तक मिले आर्थिक राहत

संतोष सुमन ने केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस में छूट की बात नहीं कही है, बल्कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वाले EWS विद्यार्थियों के लिए भी आर्थिक सहायता मांगी है।

उनकी मांग है कि विद्यार्थियों के परिवार की सालाना आय के आधार पर नामांकन शुल्क और ट्यूशन फीस में छूट दी जाए। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी, जिनके बच्चे उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं, लेकिन कॉलेज की फीस और दूसरे खर्चों के कारण उन्हें परेशानी होती है।

IIT और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी मिले स्कॉलरशिप

मंत्री ने IIT, मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति की मांग की है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ कॉलेज की फीस ही नहीं, बल्कि हॉस्टल, मेस और पढ़ाई से जुड़े दूसरे जरूरी खर्चों में भी सरकार को मदद करनी चाहिए।

कई बार दाखिला मिल जाने के बाद भी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं। ऐसे छात्रों को वित्तीय सहायता मिलने से उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ सकते हैं।

SC-ST और पिछड़े वर्गों की सुविधाओं में कटौती की मांग नहीं

संतोष सुमन ने अपनी मांग को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी दूसरे वर्ग को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती करना नहीं है। आरक्षण का अपना संवैधानिक और सामाजिक महत्व है, जबकि आर्थिक सहायता का आधार जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

'सबका साथ, सबका विकास' तभी होगा पूरा, जब गरीब बच्चों को मिले समान अवसर

मंत्री संतोष सुमन के मुताबिक, 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' की भावना तभी पूरी हो सकती है, जब आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिले।

उन्होंने केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों से भी अपील की कि EWS वर्ग के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, परीक्षा शुल्क में रियायत और उच्च शिक्षा में फीस छूट की व्यापक नीति तैयार की जाए।

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