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EPFO के नए फैसले से बिहार के लाखों कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, PF कवरेज की लिमिट हुई ₹25000

Published: Wed, 16 Sep 2026 08:34 PM (GMT+05:30)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी है।

ईपीएफओ वेतन सीमा बढ़ी: अब 25 हजार तक के कर्मचारियों को मिलेगा अनिवार्य पीएफ का लाभ

ईपीएफओ वेतन सीमा बढ़ी: अब 25 हजार तक के कर्मचारियों को मिलेगा अनिवार्य पीएफ का लाभ

HighLights

  1. ईपीएफओ वेतन सीमा 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये हुई।

  2. संगठित क्षेत्र के अधिक कर्मचारियों को अनिवार्य पीएफ कवरेज मिलेगा।

  3. बिहार में 20 लाख से अधिक सदस्यों को मिलेगा सीधा लाभ।

जागरण संवाददाता, पटना। दस साल से 15 हजार रुपये की वेतन सीमा में अटका कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) का दायरा अब बढ़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

इसका सीधा असर संगठित क्षेत्र के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो 15 हजार रुपये से अधिक वेतन पाने के कारण अब तक अनिवार्य पीएफ कवरेज से बाहर रह जाते थे।

बिहार में इसका असर खासा व्यापक होने की संभावना है। प्रदेश में ईपीएफओ के 20 लाख से अधिक सदस्य हैं, इनमें करीब 16 लाख सक्रिय सदस्य हैं।

नई सीमा लागू होने के बाद निजी कंपनियों और ईपीएफओ के दायरे वाले संस्थानों में 25 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारी भी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं, जिनका अभी पीएफ नहीं कट रहा है।

हालांकि, इसका वास्तविक लाभ कर्मचारी की पात्रता, प्रतिष्ठान के ईपीएफओ कवरेज और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

पटना रिजन में हर माह 1407 करोड़, दो हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद

बिहार में ईपीएफओ के सदस्य क्षेत्रीय कार्यालयों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में हैं। पटना रिजन में करीब आठ लाख, मुजफ्फरपुर में पांच लाख और भागलपुर में तीन लाख सदस्य बताए जा रहे हैं। पटना रिजन के सक्रिय खातों में कर्मचारी और नियोक्ता को मिलाकर हर माह करीब 1407 करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं।

वेतन सीमा बढ़ने के बाद नए कर्मचारी अनिवार्य कवरेज में आए तो यह राशि करीब दो हजार करोड़ रुपये मासिक तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

इसका मतलब सिर्फ पीएफ खातों की संख्या बढ़ना नहीं होगा। ईपीएफओ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बचत के साथ सामाजिक सुरक्षा की दूसरी व्यवस्थाओं का आधार भी विस्तृत होगा।

15 हजार के बाद शुरू होती थी कंपनी की भूमिका

ईपीएफओ के क्षेत्रीय निदेशक हेमंत कुमार के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में 15 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारी के लिए पीएफ खाता खोलना अनिवार्य है। 15,001 रुपये वेतन होने के बाद अनिवार्य कवरेज का प्रावधान नहीं रहता और पीएफ की सुविधा संबंधित कंपनी की व्यवस्था पर निर्भर करती है।

25 हजार रुपये की नई सीमा लागू होने पर यह स्थिति काफी हद तक बदलेगी। 25 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों का अनिवार्य कवरेज का दायरा बढ़ेगा। इससे खासकर निजी क्षेत्र में काम करने वाले उन कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है, जो नियमित नौकरी में होने के बावजूद अभी पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा से बाहर हैं।

यानी 15 हजार रुपये से कुछ अधिक वेतन पाने वाला कर्मचारी, जो अब तक कंपनी की इच्छा पर पीएफ सुविधा हासिल करता था, नई सीमा लागू होने पर अलग स्थिति में आ सकता है। हालांकि, इसके लिए अंतिम अधिसूचना और लागू नियमों को देखना जरूरी होगा।

पीएफ ही नहीं, पेंशन और बीमा से भी जुड़ेगा मामला

ईपीएफओ की सदस्यता का मतलब केवल कर्मचारी के भविष्य निधि खाते में जमा राशि नहीं है। इससे कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) जैसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी जुड़ी हैं, इसलिए वेतन सीमा बढ़ने से पात्र कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति बचत के साथ पेंशन और बीमा सुरक्षा का दायरा भी बढ़ सकता है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण पहलू योगदान की गणना और वेतन संरचना का है। कर्मचारी का वास्तविक वेतन, पीएफ योग्य वेतन, नियोक्ता का अंशदान और लागू नियम यह तय करेंगे कि खाते में कितनी राशि जमा होगी, इसलिए सीमा बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी के खाते में सीधे उसी अनुपात में पीएफ राशि बढ़ जाएगी।

दस साल पहले बढ़नी चाहिए थी सीमा

इंटक के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा कि वेतन सीमा बढ़ाने की मांग पिछले करीब दस वर्षों से की जा रही थी। उनके अनुसार, यह फैसला पहले ही हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सीमा बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा का दायरा निश्चित रूप से विस्तृत होगा और निजी क्षेत्र के अधिक कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सकेगा।

उन्होंने सरकार से ईपीएस के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की भी मांग की। उनका कहना है कि निजी क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए मौजूदा न्यूनतम पेंशन पर्याप्त नहीं है। सरकार को इस पर भी निर्णय लेना चाहिए, ताकि पीएफ कवरेज बढ़ाने के साथ सेवानिवृत्ति के बाद की सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सके।

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