पटना। पांच साल पहले पटना एयरपोर्ट से मात्र 16 से 18 विमान उड़ान भरते थे। उस वक्त सीआइएसएफ के 190 जवानों और अधिकारियों को तैनात किया गया था। पिछले पांच वर्षो में विमानों की संख्या दोगुनी हो गई, यात्रियों की संख्या तिगुनी हो गई लेकिन सीआइएसएफ की संख्या में आज तक वृद्धि नहीं की गई है। 250 से 300 यात्री प्रति घंटे के हिसाब से एयरपोर्ट पर आते थे। आज इनकी संख्या 800 तक पहुंच गई है। एयरपोर्ट निर्माण के समय इसकी क्षमता सालाना पांच लाख यात्रियों की थी। अब यात्रियों की संख्या 30 लाख के पार हो चुकी है। पहले जहां साल भर में 3000 से 3500 उड़ानें थीं, अब यह संख्या 22 हजार से पार हो चुकी है।

प्रतिदिन आठ हजार यात्री करते हैं सफर ::

पटना एयरपोर्ट से प्रतिदिन 8000 यात्रियों का आना-जाना होता है। इतने यात्रियों के लिए मात्र दो ही लगेज स्कैनर लगाए गए हैं। एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए महिलाओं के लिए एक और पुरुषों के लिए दो फ्रिस्किंग बूथ खोले गए हैं। जांच के लिए एक यात्री को औसतन 32 सेकंड का समय लगना चाहिए था, लेकिन अव्यवस्था के कारण यह समय काफी बढ़ जाता है।

सुबह की उड़ानें हुई रिशिड्यूल

कोहरे के कारण सुबह में उड़ान भरने वाले सभी विमानों को रिशिड्यूल कर दिन अथवा शाम में किया गया है। इसके कारण दोपहर से लेकर देर शाम तक फ्लाइट का बंच बनने लगा है। दोपहर से देर रात तक हमेशा एयरपोर्ट पर तीन से चार विमान खड़े रहते हैं। इन फ्लाइट के यात्रियों की एक साथ मौजूदगी एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ाती है। मात्र दो लगेज स्कैनर होने के कारण यात्रियों को सुरक्षा जांच कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

बदइंतजामी से कोढ़ में खाज

जागरण संवाददाता, पटना : रविवार वीआइपी मूवमेंट का दिन था। यह जानते हुए भी एयरपोर्ट और सीआइएसएफ प्रशासन ने कोई खास इंतजाम नहीं किए। इसका नतीजा यह हुआ कि दोपहर बाद ट्रैफिक बढ़ते ही एयरपोर्ट पर भीड़ और अफरातफरी का माहौल हो गया। वैसे लगभग रोज ऐसा दृश्य बनता है। यह कुव्यवस्था दूर करने के बजाय प्रशासन के पास टर्मिनल छोटा होने का रेडीमेड बहाना रहता है।

40 से अधिक वीवीआइपी पहुंचे थे पटना ::

डिप्टी सीएम सुशील मोदी के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए रविवार को कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केन्द्रीय मंत्रियों समेत 40 से अधिक वीवीआइपी पटना पहुंचे। एयरपोर्ट प्रशासन ने इनकी अगवानी में बेशक कोई कसर नहीं छोड़ी, पर आम यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया। यदि किसी यात्री ने अपनी असुविधा के बारे में सीआइएसएफ अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो उन्हें झिड़क और दु‌र्व्यवहार का सामना करना पड़ा। इन हालात में सीआइएसएफ कर्मियों और यात्रियों के बीच वाद-विवाद, उत्तेजना और डांट-डपट के दृश्य आम हैं यद्यपि हर बात का खामियाजा अंतत: यात्रियों को ही भुगतना पड़ता है।

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कोट ::

''यात्रियों के अनुपात में सुरक्षाकर्मियों की संख्या काफी कम है। सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रबंधन की ओर से कई मर्तबा अनुरोध किया गया है। विमानों की संख्या बढ़ती जा रही है और सुरक्षाकर्मियों की संख्या जस की तस है। इसके बावजूद सारे जवान ड्यूटी पर चौकस हैं। उनसे किसी भी यात्री ने दु‌र्व्यवहार की शिकायत नहीं की है। हां, जवान सुरक्षा मामलों में कोई समझौता नहीं कर सकते हैं।''

- विशाल दुबे, कमांडेंट सीआइएसएफ

Posted By: Jagran

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