पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग के फैसले के मुताबिक अब बिहार में अनट्रेंड प्रारंभिक शिक्षक अब सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ा सकेंगे, उन सबकी सेवा समाप्त हो जाएगी। विभाग के इस फैसले से कई शिक्षकों की नौकरी चली जाएगी। विभाग ने इसपर त्वरित कार्रवाई करने की बात कही है। 

शिक्षा विभाग के निदेशक (प्राथमिक) डॉ.रणजीत कुमार सिंह ने मंगलवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को एक सप्ताह के अंदर यह रिपोर्ट देने का आदेश दिया कि 1 अप्रैल 2019 के आदेश के आलोक में सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में कितने अनट्रेंड शिक्षकों को हटाने की कार्रवाई हुई?

वैसे प्रारंभिक शिक्षकों को भी सेवा से मुक्त किया जाएगा जो एनआइओएस (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान) से ट्रेनिंग लेने के बाद आयोजित परीक्षा में फेल हो गए थे। ऐसे शिक्षकों की अच्छी-खासी संख्या है और इन्हें भी अनट्रेंड माना गया है। 

प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने पूर्व के आदेश के आलोक में सभी जिलों से अनट्रेंड शिक्षकों को सेवा से मुक्त करने पर तेजी से अमल करने का आदेश दिया है। कहा है कि अबतक ऐसे अनट्रेंड प्रारंभिक शिक्षक यदि स्कूल में जमे हैं तो उन पर क्यों नहीं कार्रवाई की गई? इसकी भी रिपोर्ट मांगी गई है।

रिपोर्ट आने के बाद उसकी समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितने अनट्रेंड प्रारंभिक शिक्षकों को सेवा मुक्त किया गया और ऐसे कितने अनट्रेंड शिक्षक अब भी सेवा में हैं।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को लेकर यह अर्हता नियम लागू कर रखा है, जिसके तहत दो साल का डीईएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन) करने वाले शिक्षक ही ट्रेंड माने जाएंगे।

परिषद पहले ही एनआइओएस से अठारह माह का डीईएलएड का प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों को अमान्य कर चुका है, जबकि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत स्कूलों में पढ़ाने वाले अनट्रेंड शिक्षकों को हटाने का प्रावधान है। 

 

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