चादर-कंबल की ओट, रेलवे को 11 करोड़ की चोट; पूर्व मध्य रेल के AC कोच से 16 लाख से ज्यादा का सामान गायब
पूर्व मध्य रेल के एसी कोचों से 2022 से जुलाई 2026 के बीच 16 लाख से अधिक यात्री सुविधा सामग्री ...और पढ़ें

16 लाख से ज्यादा सामान का नहीं मिला हिसाब
HighLights
पूर्व मध्य रेल के एसी कोचों से 16 लाख से अधिक सामान गायब।
रेलवे को 11.53 करोड़ रुपये से अधिक का भारी वित्तीय नुकसान।
लाखों सामान गायब होने पर आरपीएफ में सिर्फ सात मामले दर्ज।
विद्या सागर, पटना। एसी कोच में सफर शुरू होते ही यात्री की सुविधा उसकी सीट तक पहुंच जाती है। बिछाने को बेडशीट, सिरहाने तकिया, ओढ़ने को कंबल और हाथ में फेस टावल। सफर खत्म होता है तो यात्री अपना सामान समेटकर उतर जाता है। लेकिन इसी सफर में रेलवे का सामान भी कोच से उतर रहा है।
फर्क सिर्फ इतना है कि यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच जाता है, रेलवे का सामान वापस नहीं पहुंचता। पूर्व मध्य रेल के पांच मंडलों से दैनिक जागरण द्वारा मांगे गए आरटीआइ के तहत मिले आंकड़े इस गायब होती सुविधा का बड़ा हिसाब सामने रखते हैं।
16 लाख से ज्यादा सामान का नहीं मिला हिसाब
वर्ष 2022 से जुलाई 2026 तक एसी कोचों से 16 लाख से अधिक सामान रेलवे के पास वापस नहीं पहुंचा। इनमें 5,94,789 फेस टावल, 5,07,377 बेडशीट, 3,84,362 तकिया कवर, 42,619 तकिए और 71,067 कंबल शामिल हैं।
आंकड़ों में सबसे बड़ा हिस्सा फेस टावल का है। करीब छह लाख फेस टावल गायब हुए। बेडशीट की संख्या पांच लाख से अधिक और तकिया कवर की करीब 3.84 लाख है।
सिर्फ तीन सामानों की संख्या 14.86 लाख पार
इन तीनों को जोड़ दें तो 14.86 लाख से अधिक सामान हो जाते हैं। यानी गायब हुए कुल सामान का बड़ा हिस्सा उन वस्तुओं का है, जिन्हें हर यात्रा में यात्रियों की सुविधा के लिए कोच में उपलब्ध कराया जाता है।
यह सिलसिला किसी एक ट्रेन या मंडल तक सीमित नहीं है। दानापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू), धनबाद, सोनपुर और समस्तीपुर पूर्व मध्य रेल के पांचों मंडलों से सामान गायब होने के आंकड़े सामने आए हैं।
तीन मंडलों में 11.53 करोड़ से ज्यादा नुकसान
यात्रियों को दी जाने वाली सुविधा सामग्री का एक बड़ा हिस्सा सफर के बाद रेलवे की व्यवस्था में वापस नहीं आया। जहां सामान के साथ आर्थिक नुकसान का आंकड़ा उपलब्ध है, वहां तस्वीर और गंभीर है।
दानापुर मंडल में 6,53,16,357.05 रुपये, डीडीयू में 2,80,72,612.20 रुपये और धनबाद में 2,19,30,484.165 रुपये के नुकसान का उल्लेख है।
ठेकेदार के बिल से हुई नुकसान की भरपाई
इन तीन मंडलों में दर्ज नुकसान ही 11.53 करोड़ रुपये से अधिक है। रेलवे के अनुसार इस नुकसान की भरपाई ठेकेदार के बिल से की गई।
सोनपुर और समस्तीपुर ने गायब सामान की संख्या तो बताई, लेकिन वित्तीय नुकसान की राशि नहीं बताई। इसलिए पांचों मंडलों का वास्तविक नुकसान दर्ज 11.53 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
AC First Class भी नहीं रहा अछूता
सुविधा सामग्री के गायब होने का सिलसिला एसी प्रथम श्रेणी तक भी पहुंचा है। सोनपुर मंडल के आरटीआइ जवाब के अनुसार पांच वर्षों में यहां 6,681 सामान गायब हुए।
इनमें 2,788 बेडशीट, 3,019 तकिया कवर और 874 तकिए शामिल हैं। यानी सुविधा सामग्री के गायब होने की समस्या केवल सामान्य एसी कोचों तक सीमित नहीं है।
लाखों सामान गायब, RPF में सिर्फ सात केस
इतनी बड़ी संख्या में सामान गायब होने के बीच आरपीएफ में दर्ज मामलों की संख्या बेहद कम है। पांच में से चार मंडलों के आरपीएफ जवाब के अनुसार पांच वर्षों में कुल सात मामले दर्ज हुए।
दानापुर में तीन मामले दर्ज हुए। इनमें 2023 में दो और 2025 में एक मामला शामिल है। इन मामलों में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया और चोरी गया सामान बरामद किया गया।
धनबाद में तीन, समस्तीपुर में एक मामला
धनबाद में 2025 में एक और 2026 में दो मामले दर्ज हुए। समस्तीपुर में 2025 में एक मामला दर्ज हुआ।
डीडीयू में पांच वर्षों में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ, जबकि सोनपुर आरपीएफ की ओर से जवाब नहीं मिला। आंकड़ों का यह अंतर कई सवाल छोड़ता है।
16 लाख सामान के सामने सिर्फ सात मामले
पांच साल में 16 लाख से अधिक सामान रेलवे के पास वापस नहीं पहुंचा, तीन मंडलों में 11.53 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज हुआ, लेकिन आरपीएफ के पास केवल सात मामले पहुंचे।
इसका मतलब यह नहीं कि हर गायब वस्तु चोरी के मामले में गई, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सामान का वापस न लौटना निगरानी व्यवस्था की गंभीर परीक्षा जरूर है।
सवाल सिर्फ पैसों की वसूली का नहीं
रेलवे ने नुकसान की भरपाई ठेकेदार के बिल से कर ली, लेकिन सवाल केवल रकम की वसूली का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जिसमें यात्रियों की सुविधा के लिए कोच में पहुंचाई गई हर वस्तु का सफर के बाद हिसाब होना चाहिए।
एसी कोच में यात्री सुविधा के लिए पहुंचाई गई बेडशीट, कंबल, तकिया, तकिया कवर और फेस टावल जैसी सामग्री की इतनी बड़ी संख्या में वापसी नहीं होना रेलवे की निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
