राज्य ब्यूरो, पटना : राज्य के किसी भी जिले में ड्राइविंग लाइसेंस बनाना अब आसान नहीं होगा। दक्ष ड्राइवर ही लाइसेंस पा सकेंगे। इसके लिए पटना व औरंगाबाद की तर्ज पर सभी जिलों में आटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बनाए जाएंगे। अत्याधुनिक ट्रैक बन जाने के बाद ड्राइविंग टेस्ट मैनुअल के बजाय स्मार्ट तकनीक से होगा। ट्रैक निर्माण के लिए राज्य के 20 बड़े जिलों को 75 -75 लाख जबकि छोटे जिलों को 50 -50 लाख की राशि दी गई है। 

डीएम से सितंबर अंत तक मांगी रिपोर्ट

परिवहन विभाग ने सभी जिलों को इस दिशा में काम तेज करने को कहा है। कई जिलों में जमीन अधिग्रहण या चिह्नित करने की कार्रवाई की जा रही है। जिन जिलों में काम में देरी हो रही है, वहां के डीएम से सितंबर अंत तक पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। 

- नई व्यवस्था पहले से ज्यादा होगी पारदर्शी 

- 75-75 लाख रुपये दिए गए हैं 20 बड़े जिलों को 

- 50 लाख की राशि दी गई है प्रत्येक छोटे जिलों को 

- पटना व औरंगाबाद में होगी ड्राइविंग जांच की मैनुअल परीक्षा

 

कई जिलों में हो रही ड्राइविंग जांच की मैनुअल परीक्षा 

फिलहाल पटना व औरंगाबाद को छोड़कर अन्य जिलों में ड्राइविंग जांच की परीक्षा मैनुअल तरीके से ही होती है। लगातार ऐसी शिकायतें आती हैं कि दलालों की मिलीभगत से आवेदकों को घर बैठे लाइसेंस मिल गया। ऐसे में नई व्यवस्था पारदर्शी होगी। खासकर चार पहिया व भारी वाहनों का लाइसेंस पाना मुश्किल हो जाएगा।

गलती पर कटेंगे अंक, कंप्यूटर देगा रिपोर्ट


आटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक में ड्राइविंग टेस्ट के लिए डिवाइडर, जेबरा क्रासिंग, सिग्नल, स्पीड नियंत्रण बोर्ड आदि लगा होगा। इसके अलावा कैमरा और सेंसर भी लगाया जाएगा। गाड़ी चलाने व दाएं- बाएं करने के अलावा गति बढ़ाने और रोकने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, इन सभी मानकों पर अंक दिए जाएंगे। गलती करने पर अंक भी काटे जाएंगे। कंप्यूटर के द्वारा ही पूरी रिपोर्ट तैयार होगी।

Edited By: Akshay Pandey