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MLC और MLA में क्या अंतर होता है? चुनाव की प्रक्रिया से लेकर कानूनी हक तक पूरी जानकारी

Published: Thu, 22 Oct 2026 05:50 PM (GMT+05:30)

Bihar MLC Election 2026 के बीच, यह लेख विधायक और एमएलसी के बीच के मुख्य अंतरों (MLC Vs MLA) को स्पष्ट करता है।

विधायक और विधान पार्षद में अंतर। एआई से बनाई गई फोटो

विधायक और विधान पार्षद में अंतर। एआई से बनाई गई फोटो

HighLights

  1. विधायक सीधे जनता द्वारा चुने जाते, एमएलसी अप्रत्यक्ष रूप से।

  2. विधानसभा अस्थायी सदन, विधान परिषद स्थायी सदन होती है।

  3. धन विधेयक पर विधानसभा का अंतिम निर्णय, एमएलसी सीमित शक्ति।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में MLC चुनाव 2026 को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 8 सीटों के लिए प्रचार अभियान थम गया है और 23 अक्टूबर को वोटिंग होनी है, लेकिन लोगों में अब भी कन्फ्यूजन है कि विधायक और MLC में आखिर क्या अंतर होता है?

विधायकों और MLC को समान दर्जा प्राप्त होता और दोनों के सैलरी-भत्ते समान होते हैं, लेकिन इसके बाद भी दोनों में बड़ा अंतर होता है। आइए एक-एक कर Difference between MLA and MLC समझते हैं।

विधायक राज्य के निचले सदन (विधानसभा) का सदस्य होता है, जबकि MLC उच्च सदन (विधानपरिषद) का सदस्य होता है।

बड़ी बात ये है कि देश के हर राज्य में विधानसभा होती है, लेकिन विधानपरिषद भारत के केवल 6 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) में है।

हालांकि विधानसभा ज्यादा ताकतवर होती है, क्योंकि इसके सदस्यों का चुनाव सीधे जनता करती है। विधानपरिषद एक गार्जियन के रूप में काम करती है, लेकिन अंतिम फैसला विधानसभा यानी विधायक ही करते हैं। आइए कुछ अन्य बड़े अंतरों पर एक नजर डालते हैं...

चुनाव की प्रक्रिया (MLC Election Process)

सभी विधायकों का चुनाव आम मतदाता सीधे करते हैं, यानी 18 साल की उम्र का कोई भी भारतीय इसके लिए वोट कर सकता है। हालांकि इसके लिए वोटर लिस्ट में आपका नाम जुड़ा होना चाहिए। विधायक का चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी की उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए।

बिहार विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष तौर पर होता है। इन्हें 5 कटेगरी के मतदाता चनते हैं। विधान परिषद के 1/3 सदस्यों को विधायक, 1/3 सदस्यों को नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के सदस्य चुनते हैं। वहीं, 1/12 सदस्यों को शिक्षक और 1/12 सदस्यों को रजिस्टर्ड ग्रेजुएट चुनते हैं। MLC के चुनाव के लिए प्रत्याशी की उम्र कम से कम 30 साल होनी चाहिए।

विधान परिषद कभी नहीं होती भंग 

विधायकों की 'विधानसभा' एक अस्थायी सदन है, यानी हर 5 साल बाद यह भंग हो जाती है और सभी सीटों के लिए एक साथ फिर चुनाव होते हैं। यानी विधायक का कार्यकाल 5 साल का होता है।

MLCs की 'विधान परिषद' स्थायी सदन है। यानी यह कभी भंग नहीं होती है। विधान परिषद के एक-तिहाई (1/3) सदस्य हर 2 साल बाद रिटायर हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव होता है। MLC का कार्यकाल 5 सालों का होता है।

विधायी शक्तियां (MLC Rights and Powers)

1. वित्तीय अधिकार (Money Bills)

धन विधेयक (Money Bill) और बजट केवल विधानसभा में ही पेश किए जा सकते हैं। वित्तीय मामलों में MLA का निर्णय अंतिम और सर्वोपरि होता है।

विधान परिषद धन विधेयक को खारिज या संशोधित नहीं कर सकती। MLC किसी धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक ही रोक सकते हैं। यदि 14 दिन में पारित न हो, तो भी विधेयक पारित मान लिया जाता है।

2. सरकार बनाने और अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion)

राज्य सरकार पूरी तरह से विधानसभा (MLA) के प्रति जवाबदेह होती है। इसलिए अविश्वास प्रस्ताव केवल विधानसभा में लाया जा सकता है। यदि यह पारित हो जाए तो मुख्यमंत्री और उनकी पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

MLC अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकते और न ही सरकार को गिरा सकते हैं। वे केवल सरकार से प्रश्न पूछकर या चर्चा में भाग लेकर दबाव बना सकते हैं।

3. राष्ट्रपति और राज्यसभा चुनाव में मतदान

भारत के राष्ट्रपति चुनाव और राज्यसभा सांसदों के चुनाव में सभी विधायक मतदान करते हैं, लेकिन  MLC को न तो राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने का अधिकार होता है और न ही राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में।

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