बिहार में MLC चुनाव कैसे होता है? 5 कैटेगरी की 75 सीट के लिए आम मतदाता नहीं देते वोट
Bihar MLC Election Process: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को चुनाव होंगे, जिसमें आम मतदाता वोट नहीं दे सकेंगे। यह चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है।
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बिहार विधान परिषद चुनाव। फोटो जागरण
HighLights
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान।
आम मतदाता नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष तरीके से चुने जाते हैं MLC।
विधायक, स्थानीय निकाय, शिक्षक, स्नातक मतदाता करते हैं चुनाव।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में विधानसभा परिषद की 8 सीटों पर चुनाव (Bihar MLC Election) का एलान हो चुका है। इसके लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा, लेकिन इसमें आम लोग वोट नहीं कर सकेंगे।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत MLC का चुनाव एक अप्रत्यक्ष प्रक्रिया (Indirect Election Process) के जरिए होता है। बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। इन सीटों का बंटवारा 5 अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है।

विधान परिषद के एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं। इसके अलावा एक तिहाई सदस्यों को नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के सदस्य चुनते हैं।
वहीं, 1/12 सदस्यों को शिक्षक और 1/12 सदस्यों को रजिस्टर्ड ग्रेजुएट चुनते हैं। घबराइए नहीं, आसान भाषा में समझाते हैं...
1 विधानसभा कोटा
बिहार में विधान पुरिषद की कुल 75 में से 27 सदस्यों को विधायक चुनते हैं। इस कोटे से चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 10 विधायकों का प्रस्तावक (Proposer) होना जरूरी होता है। इसमें सभी निर्वाचित विधायक अपना वोट कर सकते हैं।
2 स्थानीय निकाय कोटा
वहीं, 24 सदस्यों को स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के तहत वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य (BDC) और जिला पंचायत सदस्य के अलावा नगर निगम या नगरपालिका के चुने गए प्रतिनिधि (पार्षद, मेयर/डिप्टी मेयर, नगर परिषद और नगर पंचायत के पार्षद व अध्यक्ष) चुनते हैं। इस कोटे से कोई भी सामान्य नागरिक या पंचायत/नगर निकाय का प्रतिनिधि चुनाव लड़ सकता है।
3 शिक्षक कोटा
शिक्षक कोटे के सदस्यों को वह शिक्षक चुनते हैं, जो कम से कम 3 साल से राज्य के माध्यमिक स्कूल या उससे उच्च शिक्षण संस्थानों (हाई स्कूल, कॉलेज) में पढ़ा रहे हों।
इसके अलावा शिक्षक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 19 (Form 19) भरा जाना अनिवार्य है। इन सीटों पर हाईस्कूल के टीचर-प्रिसिंपल के अलावा डिग्री कॉलेज-यूनिवर्सिटी के टीचर भी इस चुनाव को लड़ सकते हैं।
4 स्नातक (ग्रेजुएट) कोटा
ग्रेजुएट कोटे के 6 सदस्यों का चुनाव ऐसे मतदाता करते हैं, जिन्होंने कम से कम 3 साल पहले स्नातक (Graduation) की डिग्री पूरी कर ली हो। इसके साथ ही उन्होंने फॉर्म-18 भरकर अपना रजिस्ट्रेशन करवाया हो।
वहीं, कैंडिडेट का भी ग्रैजुएट होना जरूरी है। संसदीय लोकतंत्र में शिक्षकों और पढ़े-लिखे लोगों की नुमाइंदगी के लिए इस कोटे की व्यवस्था की गई थी।
5 राज्यपाल द्वारा मनोनीत
इसके अलावा, 12 सदस्यों के रूप में राज्यपाल साहित्य, कला, विज्ञान, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के दिग्गजों को सीधे नॉमिनेट करते हैं, इसके लिए वोटिंग नहीं होती।
अभी इन सीटों पर होना है चुनाव
विधान परिषद कभी भंग नहीं होती। एक MLC का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है और प्रत्येक 2 वर्ष में एक-तिहाई (1/3) सदस्य रिटायर होते हैं, जिनकी जगह नए चुनाव कराए जाते हैं।
अभी जिन सीटों पर चुनाव (Bihar MLC Election 2026) होना है, वह उनमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की सीटों पर चुनाव होगा।
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आयोग के अनुसार, इन सीटों के वर्तमान विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इससे पहले नई चुनाव प्रक्रिया पूरी कराकर नए सदस्यों का निर्वाचन किया जाना है।
इन विधान पार्षदों का कार्यकाल हो रहा समाप्त
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार, तिरहुत स्नातक से वंशीधर व्रजवासी और कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव वर्तमान विधान पार्षद हैं। ।
इसी तरह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना से नवल किशोर यादव, दरभंगा से डॉ. मदन मोहन झा, तिरहुत से संजय कुमार और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आफाक अहमद विधान पार्षद हैं। इन सबका कार्यकाल 16 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
कैसे होता है MLC का चुनाव?
MLC चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) के तहत 'सिंगल ट्रांसफरएबल वोट' सिस्टम से होता है। इसमें (Bihar MLC Election Process) मतदाता को अपनी पहली, दूसरी और तीसरी वरीयता (Preference) के अनुसार वोट देना होता है। पहली वरीयता के वोट का कोटा जो भी उम्मीदवार पा लेता है, वहीं चुनाव जीतता है। इसकी गणना ऐसे होती है।

मान लीजिए, शिक्षक कोटे की 4 सीटों पर चुनाव होना है और इसके लिए कुल 100 वोट पड़े तो पहली वरीयता के 21 वोट पाने वाला चुनाव जीत जाएगा।
यदि किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटे से अधिक प्रथम वरीयता वोट मिलते हैं, तो उसके अतिरिक्त वोट उसकी दूसरी वरीयता (2nd Preference) के आधार पर अन्य उम्मीदवारों में बांट दिए जाते हैं।

यदि कोई भी उम्मीदवार कोटा नहीं छू पाता, तो सबसे कम प्रथम वरीयता वोट पाने वाले उम्मीदवार को प्रतियोगिता से बाहर (Eliminate) कर दिया जाता है, और उसकी मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता (2nd Preference) के वोटों को संबंधित शेष उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
