अरुण अशेष, पटना: आसार बता रहे हैं कि विधान परिषद चुनाव में भी कांग्रेस उप चुनाव वाले रास्ते पर चलेगी। राजद परिषद की 24 में से सात सीटों की उसकी मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। राजद ने अबतक हां या ना में जवाब नहीं दिया है। यहां तक कि पार्टी के किसी नेता को बातचीत के लिए बुलाया भी नहीं है। महागठबंधन के सबसे बड़े दल की बेरुखी से कांग्रेस में बेचैनी बढ़ रही है। यह इस रूप में जाहिर हो रही है कि पार्टी पसंद की सीटों पर अपने उम्मीदवार खोजने लगी है। 

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा पार्टी के अलग रहने की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। उन्हें अब भी राजद के सकारात्मक रुख का इंतजार है। वे कहते हैं-एक बार राजद से बातचीत हो जाए, तब कोई निर्णय लिया जाएगा। पार्टी लड़ेगी तो जरूर। गठबंधन से लड़े तो अच्छा रहेगा। कांग्रेस की उम्मीद इस बात पर टिकी है कि राजद की ओर से परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। किसी-किसी क्षेत्र में खुद को राजद का बता कर एक से अधिक उम्मीदवार वोटरों से संपर्क कर रहे हैं। उनमें ऐसे क्षेत्र भी हैं, जिस पर कांग्रेस ने दावा किया था। कुछ पर तो पिछले चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार खड़े भी हुए थे। पूर्णिया, सहरसा और कटिहार ऐसी ही सीटें हैं, जहां राजद के उम्मीदवार घूमने लगे हैं। कांग्रेस ने पिछले चुनाव की सीटों के अलावा भागलपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी और बेगूसराय की मांग की थी। इन क्षेत्रों में भी राजद के उम्मीदवार घूम रहे हैं। भागलपुर-बांका की सीट महागठबंधन के घटक दल भाकपा को दी गई है। भाकपा उम्मीदवार संजय यादव प्रचार में जुट गए हैं। 

अकेले लड़नी होगी लड़ाई

कांग्रेस को यह लड़ाई खुद लड़नी होगी। उसे महागठबंधन के दूसरे दलों का साथ मिलने की संभावना नहीं है। भाकपा एक सीट लेकर संतुष्ट है। माकपा की ओर से पहल नहीं हुई है। भाकपा माले इस चुनाव में भागीदारी के फैसले पर फिर से विचार कर रहा है। अधिक संभावना यही है कि माले इस चुनाव में उम्मीदवार न दे। वह महागठबंधन के उम्मीदवारों की मदद करे। एवज में विधायकों के वोट से भरी जाने वाली विधान परिषद की सीटों में हिस्सा मांगे। त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव में मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्य के पदों पर वाम कार्यकर्ताओं की जीत हुई है।

Edited By: Akshay Pandey