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बिहार कांग्रेस के नए मीडिया विभाग में दिखा जातीय समीकरण, 93 सदस्यों की टीम में 46 पिछड़ा-दलित-आदिवासी चेहरे

Published: Mon, 05 Oct 2026 12:28 PM (IST)

बिहार कांग्रेस ने लंबी प्रक्रिया के बाद टैलेंट हंट के जरिए 93 सदस्यों का नया मीडिया विभाग गठित किया है, ...और पढ़ें

टीवी डिबेट से आगे बढ़ा कांग्रेस का मीडिया ढांचा

टीवी डिबेट से आगे बढ़ा कांग्रेस का मीडिया ढांचा

HighLights

  1. बिहार कांग्रेस ने 93 सदस्यीय नया मीडिया विभाग बनाया।

  2. टीम में सामाजिक समीकरण का विशेष ध्यान रखा गया।

  3. पिछड़े, दलित, आदिवासी वर्गों से 46 सदस्य शामिल।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार कांग्रेस ने लंबी प्रक्रिया के बाद टैलेंट हंट के जरिए अपने नए मीडिया विभाग का गठन कर दिया है। हाईकमान से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने नई टीम को लेकर आदेश जारी किया है। 93 सदस्यों वाले इस मीडिया विभाग में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

टीम में अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सामान्य वर्ग के 44, ओबीसी के 21, एससी के 13, ईबीसी के 10 और एसटी के दो सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा, दलित और आदिवासी वर्गों से कुल 46 चेहरे नई मीडिया टीम का हिस्सा बने हैं।

सामान्य वर्ग के 44 चेहरे, ओबीसी के 21 सदस्यों को जिम्मेदारी

नवगठित मीडिया विभाग में सामान्य वर्ग की संख्या सबसे अधिक है। कुल 44 सदस्यों को इस वर्ग से जगह मिली है। इसके बाद ओबीसी वर्ग से 21 सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। ओबीसी और ईबीसी को मिलाकर कुल 31 चेहरे टीम में शामिल हैं।

एससी वर्ग के 13 और एसटी वर्ग के दो सदस्यों को भी टीम में स्थान दिया गया है। यानी कांग्रेस ने मीडिया विभाग के गठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का दायरा व्यापक रखने की कोशिश की है।

टीवी डिबेट से आगे बढ़ा कांग्रेस का मीडिया ढांचा

नई टीम को केवल टीवी बहसों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें राज्य मीडिया संयोजक, उपाध्यक्ष, क्षेत्रीय समन्वयक, प्रवक्ता, मीडिया पैनलिस्ट, शोधकर्ता, प्रचार समन्वयक और जिला प्रवक्ता जैसे अलग-अलग पद शामिल किए गए हैं।

इससे साफ है कि पार्टी मीडिया विभाग को संगठन और राजनीतिक संदेश के व्यापक माध्यम के रूप में विकसित करना चाहती है। शोध से लेकर प्रचार और जिलास्तरीय संचार तक अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां बांटी गई हैं।

सामाजिक समीकरण के जरिए अलग-अलग वर्गों तक पहुंचने की कोशिश

कांग्रेस के लिए नई मीडिया टीम का सामाजिक प्रतिनिधित्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही चेहरे आने वाले समय में पार्टी के राजनीतिक मुद्दों और संदेश को जनता के बीच रखने वाले हैं।

पिछड़ा, अत्यंत पिछड़ा, दलित और आदिवासी वर्गों से 46 सदस्यों को शामिल करने के पीछे अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पार्टी की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

संगठन को सक्रिय करने की कोशिश, अब प्रदर्शन की बारी

बिहार में कांग्रेस संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मीडिया विभाग का नया ढांचा पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

अब इस टीम के सामने चुनौती सिर्फ पार्टी का पक्ष रखने की नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दों को जिलों और समाज के अलग-अलग वर्गों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की होगी।

नई टीम सामाजिक प्रतिनिधित्व के पैमाने पर कितनी सफल होती है, इसका असर आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक सक्रियता पर भी दिखाई दे सकता है।