पटना [सुनील राज] । बिहार विधान परिषद के पांच राजद सदस्यों को अपने पाले में करने के बाद अब जदयू के निशाने पर कांग्रेस आ गई है। प्रारंभिक तौर पर जदयू की कोशिश सफल होती भी नजर आ रही है। कांग्रेस के पांच विधायक जदयू के सीधे संपर्क में हैं। दो और विधायकों को मनाने की कोशिश हो रही है। सूत्र बता रहे हैं कि सरकार के भवन निर्माण मंत्री डाॅ. अशोक चौधरी को कांग्रेस में तोड़फोड़ की जवाबदेही दी गई है। वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।

सूत्रों की मानें तो इन पांच विधायकों में से तीन पहले से ही इनके करीबी रहे हैं, जबकि दो पूर्व में जदयू के साथ ही थे। चौधरी जिस समय कांग्रेस को गुडबाय कह रहे थे, उसी वक्त इन विधायकों की भी कांग्रेस को अलविदा कहने की तैयारी थी, लेकिन संख्या बल नहीं होने और सदस्यता पर होने वाले खतरे को देखते हुए बात बनी नहीं।  अब जबकि विधानसभा चुनाव में करीब-करीब दो महीने का समय शेष बचा है, अधूरे काम को पूरे किए जा रहे हैं। अब सदस्यता जाने-रहने का कोई मतलब भी नहीं रह गया है। इनकी पेंशन में भी तकनीकी बाधा नहीं है।

पार्टी के अंदरखाने के सूत्र बताते हैं कि इनमें दो विधायक ऐसे हैं, जो पूर्व में जदयू में ही थे और जिन्हें 2015 के चुनाव में कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ाया गया था। इनमें एक मुस्लिम बहुत क्षेत्र कटिहार जिले से आते हैं तो दूसरे पड़ोसी झारखंड की सीमा के पास से आते हैं। दो विधायक पूर्व अध्यक्ष के सबसे करीबी रहे हैं। इनमें एक बिजुरिया बाबा के क्षेत्र से आते हैं। 

कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेताओं को भी दल के अंदर जल्द होने वाली टूट-फूट की भनक है और पार्टी इसे रोकने की कवायद भी कर रही है। हालांकि, इस मसले पर पार्टी के वरिष्ठ नेता अनभिज्ञता जता रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा कहते हैं कि चुनाव के वक्त टूट-फूट होती रहती है। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं। उन्होंने कहा कुछ विधायक बैठक वगैरह में नहीं आते हैं। 

Posted By: Rajesh Thakur

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