विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

CM सम्राट चौधरी से मिले पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, बिहार के विकास का बताया नया मॉडल

Published: Sat, 17 Oct 2026 12:29 PM (IST)

पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर बिहार के विकास के लिए प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण ...और पढ़ें

लोक सेवक आवास में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करते पर्यावरणविद् पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित डा. अनिल प्रकाश जोशी। सौ. स्वयं

लोक सेवक आवास में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करते पर्यावरणविद् पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित डा. अनिल प्रकाश जोशी। सौ. स्वयं

HighLights

  1. डॉ. जोशी ने बिहार में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया।

  2. GEP मॉडल और 'बिहार डेवलपमेंट डायलॉग' शुरू करने पर जोर दिया।

  3. जल संरक्षण, वन विस्तार और नदियों के पुनर्जीवन को अहम बताया।

जागरण संवाददाता, पटना। बिहार में विकास की योजनाओं के साथ प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है। जल संरक्षण, वनों का विस्तार और नदियों का पुनर्जीवन राज्य के विकास की रणनीति का अहम हिस्सा होना चाहिए। पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानितपर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने शनिवार को लोक सेवक आवास में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान यह सुझाव दिया।

डॉ. जोशी ने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए। योजनाओं का आकलन इस आधार पर भी किया जाना चाहिए कि उनसे प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण को कितना लाभ पहुंच रहा है। उन्होंने बिहार के लिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया।

बिहार डेवलपमेंट डायलॉग शुरू करने का सुझाव

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान डॉ. जोशी ने ‘बिहार डेवलपमेंट डायलॉग’ शुरू करने का सुझाव दिया। इसके तहत राज्य के विभिन्न संस्थानों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विकास की दिशा, प्राथमिकताओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि सामूहिक विचार-विमर्श के जरिए ऐसी योजनाएं तैयार की जा सकती हैं, जिनमें आर्थिक विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को भी जगह मिले। इससे बिहार के विकास का रोडमैप तैयार करने में मदद मिल सकती है।

GDP के साथ पर्यावरण की स्थिति का भी हो आकलन

डॉ. जोशी ने विकास की सफलता मापने के लिए केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर निर्भर रहने के बजाय पर्यावरणीय स्थिति को भी महत्व देने की बात कही। उन्होंने उत्तराखंड की तर्ज पर बिहार में भी ग्रास एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया।

GEP के माध्यम से यह आकलन किया जा सकता है कि विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की स्थिति में कितना सुधार हुआ है। इस तरह विकास योजनाओं के आर्थिक लाभ के साथ उनके पर्यावरणीय प्रभाव को भी समझने में मदद मिल सकती है।

जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन पर जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल संरक्षण, पर्यावरण की सुरक्षा और नदियों के पुनर्जीवन को लेकर डॉ. जोशी की पहल की सराहना की। डॉ. जोशी ने कहा कि बिहार में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की व्यापक संभावनाएं हैं।

अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने रास्ते में वनों के विस्तार और तालाबों के संरक्षण से जुड़े कई उदाहरण देखे। उनके मुताबिक, प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। जलस्रोतों का संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे कदम पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।

बांका की सफाई व्यवस्था ने किया प्रभावित

बिहार यात्रा के दौरान डॉ. जोशी ने बांका की सफाई व्यवस्था की खास तौर पर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बांका भले ही छोटा शहर है, लेकिन वहां के लोगों में अपने शहर को स्वच्छ रखने के प्रति समर्पण दिखाई दिया।

उन्होंने रास्ते में कुछ दुकानदारों को चाय पीने के बाद इस्तेमाल किए गए छोटे गिलास सड़क पर फेंकने के बजाय बाल्टी में जमा करते देखा।

डॉ. जोशी के अनुसार, इस तरह की छोटी-छोटी पहल स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान दे सकती हैं। शहरों और गांवों को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए जनभागीदारी और जागरूकता जरूरी है।

जनकपुर से उत्तराखंड तक तीन हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी दो अक्टूबर को नेपाल के जनकपुर धाम से 16 सदस्यीय दल के साथ साइकिल यात्रा पर निकले हैं। ‘प्रकृति ही प्रभु है’ संदेश के साथ शुरू हुई यह यात्रा उत्तराखंड तक करीब तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

यात्रा का उद्देश्य पर्यावरण, हिमालय और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इसके जरिए प्रकृति के महत्व और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की जरूरत का संदेश दिया जा रहा है।

बिहार में मुख्यमंत्री से मुलाकात और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सुझाव भी इसी व्यापक जागरूकता अभियान का हिस्सा हैं।

यह भी पढ़ें- पद्मभूषण डॉ अनिल जोशी की साइकिल यात्रा पहुंची पटना साहिब, GDP के साथ GEP को भी विकास का पैमाना बनाने का संदेश