पद्मभूषण डॉ अनिल जोशी की साइकिल यात्रा पहुंची पटना साहिब, GDP के साथ GEP को भी विकास का पैमाना बनाने का संदेश
पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में जनकपुर से शुरू हुई राष्ट्रीय साइकिल यात्रा पटना साहिब पहुंची है। यह ...और पढ़ें

आर्थिक तरक्की के साथ प्रकृति को बचाना भी जरूरी
HighLights
डॉ. अनिल जोशी की साइकिल यात्रा पटना साहिब पहुंची।
GDP के साथ GEP को विकास का पैमाना बनाने पर जोर।
पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास का संदेश दे रही यात्रा।
डिजिटल डेस्क, पटना। पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास का संदेश लेकर जनकपुर, नेपाल से शुरू हुई राष्ट्रीय साइकिल यात्रा पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पहुंची। पद्मभूषण पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य आर्थिक विकास के साथ प्रकृति की सेहत को भी महत्व देना है।
यात्रा के जरिए GDP के साथ GEP यानी सकल पर्यावरण उत्पाद को विकास का अहम पैमाना बनाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
पटना साहिब गुरुद्वारा में साइकिल यात्रियों का स्वागत
16 तारीख को पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारा पहुंचने पर साइकिल यात्रियों का स्वागत किया गया। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह सहित प्रमुख सेवादारों और कार्यकर्ताओं ने डॉ. जोशी एवं उनके साथियों का अभिनंदन किया।
इस मौके पर पर्यावरण कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे। सभी ने प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ निकाली जा रही इस राष्ट्रीय साइकिल यात्रा की सराहना की।
GDP के साथ GEP भी बताएगा विकास की असली तस्वीर
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि सभी धर्मों में प्रकृति को ईश्वर के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया गया है। वर्तमान समय में अपनी पुरातन परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान को फिर से महत्व देने की जरूरत है।
यात्रा के समन्वयक और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत पत्रकार पंकज मालवीय ने अभियान के उद्देश्य समझाए। उन्होंने बताया कि GDP देश की आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन को दर्शाता है, जबकि GEP के जरिए जंगल, जल, मिट्टी, जैव-विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र से मिलने वाले लाभों को समझने पर जोर दिया जाता है।
आर्थिक तरक्की के साथ प्रकृति को बचाना भी जरूरी
पंकज मालवीय के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ें, लेकिन जंगल, नदियां, तालाब और मिट्टी लगातार खराब होते जाएं, तो विकास की तस्वीर अधूरी रह जाती है। वास्तविक समृद्धि के लिए आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी जरूरी है।
इसी सोच के तहत GDP के साथ GEP को भी विकास के आकलन में महत्व देने का संदेश दिया जा रहा है। अभियान का मानना है कि विकास की योजनाओं में आय और उत्पादन के साथ प्रकृति की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जनकपुर से शुरू हुई 3000 किलोमीटर की यात्रा
‘जल, जीवन, जन-जागरण’ के संदेश के साथ यह राष्ट्रीय साइकिल यात्रा गांधी जयंती, 2 अक्टूबर को नेपाल के जनकपुर से शुरू हुई थी। इसकी परिकल्पना करीब 3000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कई राज्यों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने की है।
यात्रा के निर्धारित मार्ग में देवघर, पटना, लखनऊ, दिल्ली और देहरादून शामिल हैं। आयोजकों के मुताबिक, बिहार के मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद यात्री आरा और बक्सर होते हुए उत्तर प्रदेश की ओर आगे बढ़ेंगे।
बिहार में जल और पर्यावरण संरक्षण क्यों अहम?
बिहार की पहचान नदियों, कृषि, जल-संस्कृति, ग्रामीण जीवन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। वहीं, राज्य के कई क्षेत्रों में बाढ़, जलजमाव, भूजल प्रबंधन और जलस्रोतों के क्षरण जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
ऐसे में विकास योजनाओं के साथ तालाबों के पुनर्जीवन, नदियों के संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, हरित क्षेत्रों के विस्तार और जैव-विविधता की स्थिति पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
अभियान के जरिए पंचायतों, स्थानीय निकायों, स्कूलों, कॉलेजों, युवाओं और सामाजिक संगठनों को प्रकृति संरक्षण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. अनिल जोशी लंबे समय से कर रहे पर्यावरण संरक्षण का काम
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी देश के जाने-माने पर्यावरणविद् हैं और हिमालयन एनवायरनमेंट स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन (HESCO) के संस्थापक हैं।
उनका कार्य हिमालय संरक्षण, जल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे विषयों से जुड़ा रहा है।
इस राष्ट्रीय साइकिल यात्रा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को आम लोगों के बीच जन-अभियान बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसका प्रमुख संदेश है कि जल, जंगल, जमीन और जैव-विविधता को सुरक्षित रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। आर्थिक विकास के साथ प्रकृति की सेहत को महत्व देना ही टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक जरूरी कदम है।
