पटना, जेएनएन। बिहार में लगातार बिगड़ती जा रही कानून-व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार कठघरे में हैं।लगातार बढ़ रहे अपराध की घटनाओं को देखते हुए महज 20 दिन में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दूसरी बार समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को फटकार लगाई। सीएम ने कहा कि हर हाल में लॉ एंड अॉर्डर को दुरुस्त कीजिए।

अवैध कारोबार के विभिन्न एंगल को समझें
पटना में संवाद कक्ष में हुई इस मीटिंग में मुख्य सचिव और डीजीपी के अलावा पुलिस विभाग के आला अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने बढ़ते अपराध की घटनाओं पर नाराजगी जतायी और कहा कि हर हाल में अपराध पर काबू पाना होगा। पेट्रोलिंग और स्पीडी ट्रायल पर ध्यान देना होगा। उन्‍होंने विधि व्यवस्था के अलावा शराबबंदी से जुड़ी विभिन्न पहलुओं की भी गहन समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने यह निर्देश दिया कि जिन पुलिस अधिकारियों की शराब के धंधेबाजों के साथ मिलीभगत की जानकारी मिले, उनके खिलाफ विभाग के स्तर पर कड़ी कार्रवाई हो। थानेदार से लेकर एसपी तक विशेष तौर सतर्क रहें। शराब के अवैध कारोबार में जो गाडिय़ां पकड़ी गई हैैं, वो किसकी हैैं, उसका ठीक ढंग से पता लगाया जाए। इससे इस अवैध कारोबार के विभिन्न एंगल को समझने में सुविधा होगी। 

सेंटिमेंटल एप्रोच जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे में शराबबंदी को और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी को सेंटिमेंटल एप्रोच के साथ काम करना होगा। देसी और विदेशी शराब के धंधेबाजों को पकडऩे के लिए गंभीरतापूर्वक मंथन करें और मुस्तैद रहें। अगर यहां के अफसर और यहां के लोग शराबबंदी को खत्म करने के लिए पूरी भावना के साथ लग जाएं तो यह काफी प्रभावी तरीके से लागू होगा और देश में एक मिसाल भी बनेगा। इसके लिए सभी को प्रेरित करने कीआवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद भी राज्य में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।

पुलिस पेट्रोलिंग वाहनों पर जीपीएस लगाएं

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जो वाहन पुलिस पेट्रोलिंग में लगाए गए हैैं उनमें जीपीएस लगाने की जरूरत है। पुलिस पेट्रोलिंग लगातार होनी चाहिए। लंबित वारंट और कुर्की जब्ती के मामलों का शीघ्र निष्पादन किया जाए। बैठक में थानावार अपराध विश्लेषण, अनुसंधान गुणवत्ता, स्पेशल ब्रांच के सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्गठन, आर्थिक अपराध तथा आसूचना संग्रह पर भी चर्चा हुई।

थानों में लैैंडलाइन फोन लगाना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि थानों में लैैंडलाइन फोन लगाया जाना सुनिश्चित किया जाए। कानून व्यवस्था की स्थिति दुरुस्त रखे जाने को ले यह आवश्यक है कि सिस्टम में नियमित रूप से सुधार हो। इसके लिए नियमित रूप से जमीनी स्तर पर काम करते रहना होगा। थानों की स्टेशन डायरी को मेंटेन रखा जाए। विशेष शाखा के सुदृढ़ होने से पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

ये थे मौजूद

समीक्षा बैठक में मद्य निषेध, उत्पाद सह निबंधन मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, मुख्य सचिव दीपक कुमार, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, अनुपम कुमार व पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारी मौजूद थे।

बता दें कि प्रदेश में हाल ही में हत्या और कैश लूट की कई बड़ी वारदातों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते एक हफ्ते में राज्य भर में 80 से अधिक हत्याएं और लूट की बड़ी वारदातें हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर बीते सात जून को भी नीतीश कुमार ने आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। इसमें गृह सचिव आमिर सुबहानी और डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे के अतिरिक्त राज्य स्तर के कई आला अधिकारी भी मौजूद थे। लगभग तीन घंटे तक चली इस बैठक में मुख्‍यमंत्री ने अपराध नियंत्रण को लेकर कई आदेश दिए थे।

सात जून को हुई बैठक में  नीतीश कुमार ने कहा था कि बिहार के सारे आइजी और डीआइजी अब महीने में 10 दिन फील्ड में रहा करेंगे। अनुमंडलों में जाकर खुद से जांच किया करेंगे और वहीं रात्रि विश्राम भी करेंगे। दूसरी आेर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने बताया कि जांच में जो भी पुलिस पदाधिकारी गलत पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इधर डीजीपी गुप्‍तेश्‍वर पांडेय ने आज भी कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है तो हमारे ही विभाग के कई अधिकारियों की परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने स्‍पष्ट कहा है कि किसी भी स्थिति में अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगे।  

 

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Posted By: Kajal Kumari

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