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सावधान! आपके फिंगरप्रिंट से भी जारी हो सकता है फर्जी सिम; बिहार-ओडिशा में CBI का एक्शन, 10 ठिकानों पर रेड

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:29 PM (IST)

सीबीआई ने अवैध सिम बॉक्स के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर में 10 ठिकानों पर छापेमारी की।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. सीबीआई ने अवैध सिम बॉक्स साइबर ठगी पर बिहार-ओडिशा में छापेमारी की।

  2. एयरटेल डिस्ट्रीब्यूटर पंकज कुमार फर्जी सिम उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार।

  3. 700 से अधिक सिम कार्डों का दुरुपयोग कर की गई साइबर ठगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। अवैध सिम बॉक्स के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क के विरुद्ध सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार को बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में दस ठिकानों पर छापेमारी की।

इस दौरान साइबर अपराधियों को सिम मुहैया कराने के आरोप में टेलीकाम कंपनी एयरटेल के महुआ क्षेत्र के एरिया डिस्ट्रीब्यूटर पंकज कुमार को गिरफ्तार किया गया है। उस पर अवैध सिम बाक्स के लिए बड़ी संख्या में गलत तरीके से सिम कार्ड मुहैया कराने का आरोप है।

इस दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड समेत कई डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए। जांच में सामने आया है कि वैशाली जिले के एक दर्जन से अधिक प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) के क्रेडेंशियल का दुरुपयोग कर 700 से अधिक सिम कार्ड जारी किए गए।

डिजिटल अरेस्ट के जरिए भी की ठगी

बिहार पुलिस ने पिछले साल सुपौल में अवैध सिम बाक्स के जरिए साइबर ठगी किए जाने का पर्दाफाश किया था। जिस मकान में सिम बाक्स चलाया जा रहा था, वहां से 1300 से अधिक सिम कार्ड मिले थे।

बाद में राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी। इन सिम कार्ड से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि देशभर के कम से कम 73 साइबर अपराध मामलों से इसका कनेक्शन है।

इनमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले भी शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला कि कई लोगों के नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी।

ई-केवाइसी के नाम पर धोखे से जारी किया सिम 

सीबीआई के अनुसार, कुछ मामलों में वैध काम के लिए सिम लेने पहुंचे लोगों से धोखे से कई बार ई-केवाईसी कराया गया। वहीं, कुछ मामलों में दूसरे उद्देश्य से जुटाए गए बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर सिम जारी किए गए।

सीबीआई इस मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और जबरन वसूली, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत पहचान चोरी व कंप्यूटर संबंधी अपराध तथा दूरसंचार अधिनियम, 2022 के तहत जांच कर रही है।

सीबीआई ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। कानून प्रवर्तन एजेंसी के नाम पर फोन कर पैसे मांगने वालों के झांसे में न आएं। फर्जी निवेश योजनाओं से भी सावधान रहें।

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