नलिनी रंजन, पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) अब अभ्यर्थियों की सत्यता की जांच आंखों की पुतली से करेगा। इसकी शुरुआत इसी महीने से होने वाली परीक्षाओं से की जाएगी। आयोग की ओर से पारदर्शिता के लिए यह कवायद पहली बार की जा रही है। प्रारंभिक व मुख्य परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की पुतली को स्कैन कर डाटा सुरक्षित कर लिया जाएगा। साक्षात्कार के दौरान भी अभ्यर्थियों की पुतली को स्कैन कर डाटा से मिलान किया जाएगा। इसमें यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अभ्यर्थी पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। 

आयोग के संयुक्त सचिव सह परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षा प्रक्रिया पूरी करने के लिए कई चरणों में अभ्यर्थियों की जांच करेगा। इसमें तकनीक कई स्तर पर तकनीक का भी सहयोग लिया जा रहा है। 21 सितंबर को होने वाली साइंस एवं टेक्नोलाजी विभाग की सहायक प्राध्यापक की परीक्षा, 24 एवं 25 सितंबर तथा 27 व 28 सितंबर को होने वाली सहायक अभियंता की परीक्षा में भी अभ्यर्थियों की पुतली का सैंपल लिया जाएगा। प्रत्येक चरण में सैंपल लेने की व्यवस्था की गई है। इससे परीक्षार्थियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इसके साथ ही यूपीएससी की तर्ज पर सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर का उपयोग किया जाएगा। परीक्षाओं में इलेक्ट्रानिक गजट से कदाचार की संभावना को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है। 

मूल्यांकन व साक्षात्कार कोडिंग आधारित

आयोग में कापी का मूल्यांकन और साक्षात्कार कोड आधारित होता है। कापी की पहचान गोपनीय रखने के लिए तीन स्तर पर कोडिंग की जाती है। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का रिजल्ट भी कोड आधारित ही तैयार किए जाते हैं। फाइनल रिजल्ट तैयार होने पर ही इसे डिकोड किया जाता है। साक्षात्कार में अभ्यर्थियों का नाम तथा उनसे जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखा जाता है। सभी अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के दौरान कोड आवंटित किया जाता है। 

Edited By: Akshay Pandey