पटना, राज्य ब्यूरो। सम्राट अशोक पर टिप्पणी को लेकर शुरू हुई बयानबाजी में अब शराबबंदी का मसला भी घुस गया है। जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल पर तल्ख टिप्पणी के बाद दोनों दलों के प्रवक्ताओं में ठन गई है। जायसवाल ने शराबबंदी को लेकर तीखी टिप्पणी के जरिए फेसबुक पर लंबा पोस्ट लिखकर नसीहत दी है। अहम यह कि राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी की सुझाव को भी दरकिनार कर दिया गया है।

मीडिया की दुनिया से बाहर तो आइए

संजय जायसवाल ने सलाह दी है- मीडिया की दुनिया से बाहर जाकर अपनी पंचायत के ही किसी आम व्यक्ति से संपर्क कर लीजिए। शराबबंदी और पुलिस की भूमिका समझ में आ जाएगी। उन्होंने लिखा कि उनकी प्रवृत्ति नहीं कि व्यक्तिगत आरोपों का जवाब दें। मुझे पता चला कि जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा उनके लोकसभा क्षेत्र में जहरीली शराब के कारण हुई मृत्यु के बाद वहां जाने पर जवाब मांग रहे हैं। जदयू प्रवक्ता का मुझसे सवाल करना बताता है कि यह जदयू का बयान है, क्योंकि प्रवक्ता दल की बातें रखता है अपनी व्यक्तिगत नहीं।

जहरीली शराब के मरने वालों के घर जाना गलत नहीं

जायसवाल ने लिखा कि वे जहरीली शराब से मरने वालों के स्वजनों के घर गए थे। आगे भी जाते रहेंगे। आर्थिक मदद भी करेंगे। कोई जहरीली शराब पीकर मरता है तो निश्चित ही वह अपराध है पर इससे प्रशासनिक विफलता के दाग को धोया नहीं जा सकता। शासन के एक घटक दल के अध्यक्ष होने के नाते मेरी भी विफलता है। वे उन गरीबों से इंसानियत के नाते मिलने गए थे। पीडि़त परिवारों को थोड़ी सी मदद भी की है, क्योंकि गुनाहगार मरने वाले थे ना कि उनके स्वजन। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता निखिल आनंद और अरविंद सिंह ने जदयू नेताओं पर कठोर टिप्पणी की।

जदयू ने पूछा शराबबंदी के बारे में भाजपा अध्यक्ष अपनी बात कह रहे या पार्टी की

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल पर जदयू फिर हमलावर हो गया है। शराबबंदी को लेकर आयी उनकी टिप्पणी पर जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा ने तुरंत उनसे पूछा कि उन्होंने जो कहा है वह उनकी अपनी भावना है या फिर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बोल रहे? यह स्पष्ट करने की मांग की गई है।

जदयू प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि क्या यह समझा जाए कि संजय जायसवाल शराबबंदी के खिलाफ जो बोल रहे हैं, वह भाजपा का स्टैंड है? दरअसल उनके बयान से यह साफ मालूम हो रहा कि उन्होंने पूर्व में दिए गए अपने दो विरोधाभासी बयान पर सफाई देने की कोशिश की है। उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि सम्राट अशोक के खिलाफ अपशब्द कहने वाले दयाशंकर  सिन्हा से पुरस्कार वापसी की मांग के समर्थन में हैं या नहीं?