बिहार में हर डेढ़ दिन में भ्रष्टाचार की एक FIR, राजस्व विभाग के सबसे ज्यादा घूसखोर पकड़े गए, पुलिस भी पीछे नहीं
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर रहा है, जहाँ अब हर डेढ़ दिन में ...और पढ़ें

निगरानी ब्यूरो भ्रष्टाचारियों पर कर रहा कार्रवाई। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बिहार में अब हर डेढ़ दिन में एक भ्रष्टाचार FIR.
राजस्व विभाग से सर्वाधिक 20 भ्रष्टाचारी पकड़े गए.
भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने में चार गुना वृद्धि हुई.
राज्य ब्यूरो, पटना। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो हर तीन दिन में दो भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर रहा है। इस साल सबसे अधिक घूसखोर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से पकड़े गए हैं।
निगरानी की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर तक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से सबसे अधिक 20 पदाधिकारी एवं कर्मी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं।
इसके बाद पुलिस के 17 और पंचायती राज विभाग के 12 भ्रष्ट लोक सेवक ट्रैप में दबोचे जा चुके हैं। ट्रैप की सबसे अधिक कार्रवाई राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में ही हुई है।
डीजी ने बताया घूस लेने के मामले दर्ज होने में 140 प्रतिशत इजाफा
निगरानी के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने शुक्रवार को कार्यालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 2024 तक औसत 11-12 दिनों में एक प्राथमिकी दर्ज होती थी।
जबकि अब औसत डेढ़ दिन में एक प्राथमिकी हो रही है। रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले कांडों में भी 140 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
पिछले 25 वर्षों के दौरान औसत 47 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस वर्ष अब तक 113 मामले दर्ज हो चुके हैं। इस वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा 142 तक पहुंचने की संभावना है।
इस साल 22 भ्रष्टाचारियों को दिलाई गई सजा
निगरानी डीजी ने बताया कि भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने में इस साल चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले 25 वर्षों यानी वर्ष 2000 से 2024 तक भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने का औसत 5.6 था जबकि इस साल अक्टूबर तक 22 भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि अभी ट्रायल कराने में औसत 13 वर्ष का समय लग रहा, जिसे कम करने पर फोकस किया जा रहा है। शिक्षक जांच के मामले में अब तक हुई कार्रवाई को देखें, तो पिछले 11 वर्षों से इसकी जांच चल रही है।
डीए के मामले में भी 25 प्रतिशत की वृद्धि
अब तक कुल 1717 प्राथमिकी दर्ज हुई है। औसतन प्रत्येक वर्ष 156 प्राथमिकी दर्ज की जाती थी जबकि सिर्फ इस वर्ष अकेले 166 कांड दर्ज किए गए।
इसमें 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डीए के मामलों में 25 वर्षों का औसत आठ था जो इस वर्ष यह बढ़कर 10 हो गया। इसमें 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एओपीए से संबंधित कांड 25 वर्षों में 18 दर्ज किए गए थे और इस वर्ष दो मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि एओपीए में मामले कम दर्ज होने का कारण है कि अब किसी लोक सेवक के खिलाफ पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज करने से पहले संबंधित विभाग से इसके लिए अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है।
