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बिहार की बड़ी तैयारी, RBI के ई-कुबेर से 3000 करोड़ जुटाएगी राज्य सरकार

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

बिहार सरकार मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम के माध्यम से राज्य सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी कर 3,000 करोड़ रुपये जुटाएगी।

बिहार की बड़ी तैयारी, RBI के ई-कुबेर से 3000 करोड़ जुटाएगी राज्य सरकार

बिहार की बड़ी तैयारी, RBI के ई-कुबेर से 3000 करोड़ जुटाएगी राज्य सरकार

HighLights

  1. बिहार 3,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां नीलाम करेगा।

  2. नीलामी आरबीआई के ई-कुबेर सिस्टम से होगी।

  3. प्रतिभूतियां 2044 और 2051 में परिपक्व होंगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। मंगलवार को होने वाली राज्य सरकारी प्रतिभूतियों (एसजीएस) की नीलामी में बिहार कुल 3,000 करोड़ रुपये जुटाने का जतन करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ई-कुबेर सिस्टम से यह नीलामी होगी। शाम तक परिणाम भी घोषित हो जाएंगे। सफल बोलीदाताओं (बिडर्स) द्वारा अगले दिन यानी बुधवार को भुगतान किया जाएगा।

इन प्रतिभूतियों पर प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल और 14 अक्टूबर को छमाही आधार पर ब्याज दिया जाएगा। इनमें 1000 करोड़ की प्रतिभूतियां की परिपक्वता अवधि वर्ष 2044 होगी। 2000 करोड़ की प्रतिभूतियां 2051 में परिपक्व होंगी।

सरकारी प्रतिभूति सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक सुरक्षित ऋण साधन है। बहरहाल, आरबीआई खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के अंतर्गत 31,200 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी करेगा। ये प्रतिभूतियां बिहार के अलावा 12 अन्य राज्यों की होंगी।

आरबीआई को यह तय करने का अधिकार होगा कि प्रत्येक प्रतिभूति की कितनी राशि बेची जाए। उल्लेखनीय है कि ओएमओ के अंतर्गत सरकारी प्रतिभूतियां बेचकर बैंकिंग प्रणाली से नकदी निकाली जाती है।

जब सरकार को अपने खर्चों या परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन की आवश्यकता होती है, तो वह जनता, बैंकों या संस्थाओं से कर्ज लेती है। इसके बदले निवेशकों को एक निश्चित ब्याज देती है और तय समय पूरा होने पर मूलधन वापस करती है।

यही सरकारी प्रतिभूतियां हैं। इन्हें सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। इनमें निवेशकों को तय दर पर नियमित अंतराल पर ब्याज मिलता है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें सेकेंडरी मार्केट (गिल्ट मार्केट) में आसानी से खरीदा या बेचा जा सकता है।

राज्यवार प्रतिभूतियों की नीलामी: तमिलनाडु 7000 करोड़, बंगाल 5400 करोड़, उत्तर प्रदेश 3500 करोड़, हरियाणा 3500 करोड़, बिहार 3000 करोड़, कर्नाटक 2000 करोड़, गुजरात 2000 करोड़, उत्तराखंड 1500 करोड़, छत्तीसगढ़ 1200 करोड़, असम 1000 करोड़, ओडिशा 1000 करोड़, केरलम 1000 करोड़, मिजोरम 100 करोढ़।