बिहार के प्राइवेट ITI में मानकों की अनदेखी, केंद्र सरकार के निर्देश पर होगी जांच
बिहार में संचालित सभी निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की जांच की जाएगी। यह जांच बुनियादी सुविधाओं की कमी और ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बिहार के सभी निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की होगी जांच।
बुनियादी सुविधाओं और पेशेवर शिक्षकों की कमी प्रमुख मुद्दा।
केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय के मानकों पर होगी पड़ताल।
राज्य ब्यूरो, पटना। प्रदेश में संचालित हो रहे सभी निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआइ) की जांच होगी। वर्तमान में 1258 निजी संस्थान हैं। सरकार द्वारा तय मानदंडों के आधार पर इन सभी संस्थानों की जांच की जाएगी। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने इसकी तैयारी की है।
अधिसंख्य निजी आइटीआइ में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, शिक्षकों की कमी है। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने जो मानक तय कर रखे हैं उनके आधार निजी आइटीआइ की जांच होगी।
मानक के अनुसार, भवन में बिल्डिंग बाइलाज का पालन करना अनिवार्य है। दो सौ प्रशिक्षणार्थी के लिए गांव में कम से कम दो एकड़ और शहरी इलाके में सवा एकड़ जमीन जरूरी है।
लीज पर जमीन लेने पर दस साल का लीज रखना है। छत पक्का या इंडस्ट्रीयल शीट का हो और कैंपस में प्रवेश के लिए कम से कम छह गेट हों। 25 वर्गमीटर लम्बा और कम से कम तीन वर्गमीटर चौड़ा वर्गकक्ष रखना है।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने हेतु प्रदेश में संचालित सभी निजी आइटीआइ में आधारभूत संरचना की जांच कराने को कहा है।
इसमें उन मानकों की भी जांच-पड़ताल करायी जाएगी, जो निजी आइटीआइ स्थापित करने हेतु आवश्यक है। ज्यादातर निजी संस्थान पक्के भवन नहीं बल्कि टीन शेड वाले मकानों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रयोगशाला की सुविधा तक नहीं है।
पेशेवर शिक्षकों की भी कमी है किंतु, अधिकांश निजी आइटीआइ में मानकों का अनुपालन नहीं होने की शिकायतें मुख्यालय को प्राप्त होती हैं। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश के आधार पर निजी आइटीआइ की जांच करायी जाएगी।
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