बिहार के हर पंचायत तक पहुंचेगी मौसम की सटीक चेतावनी, पूर्णिया और दरभंगा में लगेंगे नए रडार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक ने बताया कि बिहार के हर पंचायत तक मौसम की सटीक चेतावनी पहुंचेगी।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
हर पंचायत तक पहुंचेगी मौसम की सटीक चेतावनी।
पूर्णिया और दरभंगा में स्थापित होंगे नए मौसम रडार।
2030 तक मौसम पूर्वानुमान में 10-15% सुधार का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, पटना। 1970 के बाद जलवायु परिवर्तन की स्थिति बदली है। साल दर साल इसकी प्रकृति में बदलाव आया है। बिहार की तुलना में राजस्थान में भारी वर्षा की प्रवृत्ति बढ़ी है।
अगस्त तक बिहार में भारी वर्षा की कमी थी। सितंबर में इसकी थोड़ी भरपाई हुई। हालांकि इस बार भी बिहार में सामान्य से 32 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
ये बातें भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कही। भारत मौसम विभाग, मौसम विज्ञान सोसाइटी की ओर से दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन संस्थान पटना में जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान महापात्र ने कहा कि आने वाले दिनों में हर पंचायत तक मौसम की चेतावनी लोगों को मिलेगी। इसके लिए विभाग की ओर से विशेष कार्य किए जा रहे हैं। राज्य के पूर्णिया और दरभंगा में नए रडार स्थापित होंगे।
इससे लोगों को मौसम संबंधी सटीक जानकारी मिलेगी। देश में रडार की संख्या 52 से बढ़ाकर 130 करने की योजना है। रडार और आटोमेटिक वेदर स्टेशन को मौसम पूर्वानुमान प्रणाली से जोड़ कर जिला से लेकर पंचायत स्तर तक मौसम की निगरानी होगी।
बिहार सरकार की मदद से भारत सरकार ने पूर्वानुमान और अर्ली वार्निंग सिस्टम में सुधार किया है। 2030 तक पूर्वानुमान में 10 से 15 प्रतिशत तक बेहतर कार्य करेंगे।
विज्ञान, तकनीक और समाज को मिलकर करना होगा कार्य
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज केवल विज्ञानियों और मौसम विशेषज्ञों का विषय नहीं बल्कि पूरी मानवता के सामने एक बड़ी चुनाैती है।
बिहार में बाढ़, सूखा, अत्यधिक वर्षा, गर्मी, वज्रपात और बदलते मौसम का सीधा असर जनजीवन और आजीविका पर पड़ता है।
इससे निपटने के लिए विज्ञान, तकनीक, प्रशासन और समाज को मिलकर कार्य करना होगा। 1999 में ओडिशा में आए चक्रवात और 2023 में चक्रवात बिपरजाय का उदाहरण देते हुए कहा कि समय पर चेतावनी, बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल से लोगों की जान बचाई गई।
राज्यपाल ने कहा कि बिहार का भूगोल तो नहीं बदल सकते लेकिन बेहतर ज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और तैयारी से आपदा के नुकसान को कम किया जा सकता है।
वज्रपात जैसी घटनाओं में चेतावनी को समय पर किसानों और ग्रामीण आबादी तक पहुंचाने के लिए मोबाइल पर संदेश को मजबूत करना होगा। मौसम विभाग के लिए हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर फेलियर आज भी बड़ी चुनाैती है।
मौसम विभाग और राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सहित अन्य संस्थाओं को बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। केंद्रीय विश्वविद्यालय दक्षिण बिहार के कुलपति प्रो. केएन सिंह ने कहा कि एक संस्था और संगठन मिलकर समस्या का समाधान निकाल सकता है।
बांधों की लंबाई और बाढ़ का क्षेत्रफल भी बढ़ा है। इसके लिए रोडमैप बनाने की जरूरत है। मौके पर भारत मौसम विज्ञान सोसाइटी पटना चैप्टर के सचिव डॉ. पार्थ सारथी, मौसम विज्ञान केंद्र पटना के निदेशक आशीष कुमार समेत अन्य मौजूद रहे।
