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बिहार में ग्रामीण सड़कों का होगा कायाकल्प, ग्रीन टेक्नोलॉजी और वेस्ट प्लास्टिक से बनेगी 7,214 किमी सड़क

Published: Thu, 19 Feb 2026 04:15 AM (IST)

ग्रामीण कार्य विभाग ने 2026-27 के लिए बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु 11,312.18 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, पटना। ग्रामीण कार्य विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार हेतु एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। गांवों के विकास को रफ्तार देने के लिए विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कुल 11,312.18 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है।

विधानसभा में भोजनावकाश के उपरांत बुधवार को ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने बजट पर सरकार के उत्तर के दौरान सदन को यह जानकारी दी। सड़क निर्माण के क्षेत्र में ग्रामीण कार्य विभाग पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीक के इस्तेमाल में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से सड़कों के निर्माण में ''वेस्ट प्लास्टिक'' व ''ग्रीन टेक्नोलाजी'' का उपयोग करते हुए अब तक 7,214 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया जा चुका है। इसके अलावा, सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा 6 लाख 40 हजार पौधे लगाए गए हैं ।

सात निश्चय-3 के अधीन ग्रामीण पथों को चरणबद्ध तरीके से 5.5 मीटर (इंटरमीडिएट लेन) तक चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के माध्यम से प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाली प्रमुख ग्रामीण सड़कों का राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच) एवं राज्य उच्च पथ (एसएच) तक चौड़ीकरण किया जाएगा।

इसके लिए विभाग ने एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित कर सर्वेक्षण कार्य भी पूरा कर लिया है। प्रथम चरण में 1,887.86 किलोमीटर लंबी कुल 595 सड़कों का भौतिक सत्यापन किया गया है, जिनका निर्माण आगामी वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता के आधार पर प्रारंभ किया जाएगा।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत वर्ष 2026-27 में 3,000 किलोमीटर नए ग्रामीण पथों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 300 किलोमीटर नई सड़क एवं 300 नए पुल बनाए जाएंगे।

साथ ही, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाने के लिए विभाग के नवनियुक्त 480 सहायक अभियंताओं को आइआइटी पटना में विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही, सड़कों के पंचवर्षीय अनुरक्षण में पारदर्शिता लाने के लिए ''फेसलेस स्वशासी आधुनिक तकनीक'' विकसित की जा रही है, जिसे बहुत जल्द पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।