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बिहार में नदियों का जलस्तर घटते ही बढ़ा कटाव का खतरा; गंगा, गंडक, कोसी व सोन के तटवर्ती इलाकों पर अलर्ट

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:42 PM (GMT+05:30)

बिहार में गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदियों का जलस्तर घटने से तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया ...और पढ़ें

बिहार के पटना में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ से प्रभावित इलाके का हवाई दृश्य। (PTI)

बिहार के पटना में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ से प्रभावित इलाके का हवाई दृश्य। (PTI)

HighLights

  1. गंगा सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर घटने से कटान का खतरा बढ़ा।

  2. जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी तेज की।

  3. अधिकारियों को स्थल निरीक्षण और कटावरोधी उपाय करने के निर्देश।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में गंगा, गंडक, कोसी एवं सोन नदी में जलस्तर घटने के साथ ही तटवर्ती इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है।

पानी कम होने के उपरांत नदी की धारा कई जगह किनारों की ओर दबाव बना रही है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील तटबंधों और कटाव संभावित स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी है।

शासन की ओर से अधिकारियों को लगातार स्थल निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय इंजीनियर के अतिरिक्त विभाग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से भी निगरानी रखी जा रही है।

भागलपुर के नवगछिया में सबक लेते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद कई स्थानों पर नदी की मुख्य धारा का रुख बदलने की आशंका है। इससे तटों पर कटाव की स्थिति बन सकती है।

खासकर उन क्षेत्रों में अधिक सतर्कता बरती जा रही है, जहां पिछले वर्षों में कटान के कारण तटबंध और आसपास के गांव प्रभावित हुए हैं। विभाग की ओर से नदी की धारा, तटबंधों की स्थिति और कटाव की गति पर नजर रखी जा रही है।

गंडक में भी जलस्तर कम होने के साथ कटान को लेकर विशेष निगरानी की जा रही है। नेपाल की ओर से आने वाले पानी में उतार-चढ़ाव के कारण नदी की धारा में बदलाव होता रहता है।

बढ़ाई गई निगरानी

ऐसे में वाल्मीकिनगर से लेकर गंडक के निचले इलाकों तक संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाई गई है। विभागीय टीमें स्थानीय स्तर पर तटबंधों की स्थिति का जायजा ले रही हैं।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कहीं भी कटाव की शुरुआत होने पर तत्काल इसकी सूचना मुख्यालय को दी जाए। जरूरत के अनुसार जिओ बैग, बोल्डर और अन्य कटावरोधी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही तटबंधों पर मौजूद संवेदनशील बिंदुओं पर चौकसी बनाए रखने को कहा गया है।

विभाग का मानना है कि नदी का पानी घटने के बाद कटाव की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जलस्तर में कमी आने के बावजूद धारा का दबाव कई स्थानों पर बना रहता है।

इसलिए बाढ़ का खतरा कम होने के साथ अब कटाव से निपटने की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है। क्षेत्र में तैनात कर्मियों को ग्रामीणों के संपर्क में रहने और संवेदनशील इलाकों की स्थिति की नियमित जानकारी लेने को कहा गया है।

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