विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ट्रेनें बढ़ीं, सुरक्षा बल वहीं का वहीं: बिहार में अब हर ट्रेन में होगा रेल पुलिस का स्कॉट, 5,392 नए पदों का प्रस्ताव

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:00 AM (IST)

बिहार में ट्रेनों की बढ़ती संख्या के बावजूद रेल पुलिस का सुरक्षा कवच अपर्याप्त है, जिसके चलते पुलिस मुख्यालय ने ...और पढ़ें

रेल पुलिस का स्कॉट

रेल पुलिस का स्कॉट

HighLights

  1. बिहार में आधी ट्रेनों को ही मिल रहा पुलिस स्कॉट।

  2. सभी ट्रेनों में सुरक्षा हेतु 5,392 नए पद प्रस्तावित।

  3. सिपाही से इंस्पेक्टर तक के पद होंगे सृजित।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार से गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ी, लेकिन उनके साथ रेल पुलिस का सुरक्षा कवच उसी अनुपात में नहीं बढ़ सका। अभी राज्य से गुजरने वाली करीब आधी ट्रेनों में ही पुलिस स्कॉट की व्यवस्था है। अब पुलिस मुख्यालय ने इस कमी को दूर करने की तैयारी शुरू कर दी है।

सभी ट्रेनों में पुलिस स्कॉट उपलब्ध कराने के लिए 5,392 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। प्रस्ताव में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पद शामिल हैं।

1337 ट्रेनों की आवाजाही, आधी को ही मिल रहा पुलिस स्कॉट

वर्तमान में बिहार से करीब 1,337 ट्रेनों का आवागमन होता है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत ट्रेनों में ही अभी रेल पुलिस का स्कॉट उपलब्ध हो पाता है।

ट्रेनों और रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ यात्रियों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में सभी ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बल बढ़ाने की योजना बनाई है।

1992 के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर पद बढ़ाने की तैयारी

राजकीय रेल पुलिस के लिए आखिरी बार वर्ष 1992 में 2,565 पद स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद रेलवे नेटवर्क और ट्रेनों की संख्या में काफी विस्तार हुआ, लेकिन रेल पुलिस के स्वीकृत बल में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई।

अब करीब तीन दशक बाद पुलिस मुख्यालय ने बड़े पैमाने पर नए पदों की जरूरत महसूस की है। इसके तहत 5,392 पदों की स्वीकृति के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है।

सिपाही से इंस्पेक्टर तक बढ़ेगा रेल पुलिस बल

नए पदों में निचले स्तर के पुलिसकर्मियों के साथ-साथ अधिकारी स्तर के पद भी शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ ट्रेनों में स्कॉट बढ़ाना नहीं, बल्कि रेल पुलिस की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार अतिरिक्त बल मिलने पर ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार किया जा सकेगा और मौजूदा रेल पुलिस ढांचे पर दबाव भी कम होगा।

चार रेल जिले, 68 थाने; ढांचा भी बढ़ाने की तैयारी

फिलहाल बिहार में रेल पुलिस के चार जिले—पटना, मुजफ्फरपुर, कटिहार और जमालपुर हैं। इनके तहत 12 पुलिस सब-डिवीजन, 17 रेल सर्किल और 68 रेल थाने काम कर रहे हैं।

पुलिस मुख्यालय ने रेल पुलिस के इस प्रशासनिक ढांचे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। यानी योजना सिर्फ अतिरिक्त जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि रेल पुलिस के पूरे नेटवर्क के विस्तार की तैयारी है।

राज्य ने अपने स्तर पर 1,251 पद किए फंक्शनल

रेल पुलिस में बल की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने स्तर से 1,251 पदों को फंक्शनल किया है। इन पदों पर होने वाले खर्च का हिसाब-किताब भी तैयार किया जा रहा है।

हालांकि सभी ट्रेनों में स्कॉट उपलब्ध कराने के लिए इससे कहीं अधिक बल की जरूरत बताई जा रही है। इसी वजह से 5,392 नए पदों का प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा गया है।

रेलवे-बिहार के बीच 225 करोड़ का हिसाब भी बाकी

रेल पुलिस से जुड़े मुद्दे के साथ बिहार और रेलवे के बीच वित्तीय हिसाब-किताब भी लंबित है। दोनों के बीच करीब 225 करोड़ रुपये का बुक सेटलमेंट किया जाना है।

पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार पिछले दो-तीन वर्षों में केंद्रीय हिस्सेदारी नहीं मिलने के कारण यह राशि बकाया है। वहीं रेलवे की भी कुछ राशि राज्य सरकार के पास होने की बात सामने आई है।

बुक सेटलमेंट के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोर

अब दोनों पक्षों के बीच बकाया राशि का हिसाब-किताब करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए केंद्र से पत्राचार किया जा रहा है। इसके साथ ही रेल पुलिस के विस्तार का प्रस्ताव भी केंद्र के स्तर पर विचार के लिए भेजा गया है।

अगर 5,392 नए पदों को मंजूरी मिलती है तो बिहार में रेल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लक्ष्य साफ है—रेलवे नेटवर्क जितना बड़ा हुआ है, उसकी सुरक्षा व्यवस्था भी उसी अनुपात में मजबूत हो।

यह भी पढ़ें- पटना मोकामा में 81 मिनट थमी हावड़ा-नई दिल्ली दुरंतो की रफ्तार: प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही फेल हुआ इंजन