महिलाओं और बच्चों के लिए बिहार पुलिस की खास पहल, SC के आदेश के बाद गांधी जयंती पर शुरू होगी नई व्यवस्था
राज्य के सभी पुलिस थानों में 2 अक्टूबर से बाल सहायता डेस्क शुरू होंगे, जहां नाबालिगों से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान होगा और महिला पुलिसकर्मी भी तैनात रहेंगी।

एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
सभी पुलिस थानों में 2 अक्टूबर से बाल सहायता डेस्क की शुरुआत।
नाबालिगों की शिकायतों के त्वरित समाधान हेतु महिला पुलिसकर्मी भी तैनात।
बढ़ते बाल अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
जागरण संवाददाता, पटना। बिहार पुलिस अब राज्य के हर थाने में बाल सहायता डेस्क (चाइल्ड हेल्प डेस्क) स्थापित करेगी। यहां नाबालिग बच्चों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा किया जाएगा। लड़कियों की शिकायतों के लिए महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी।
यह व्यवस्था गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से लागू होगी। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी कर अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही 5 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया गया है।
अपराध अनुसंधान विभाग के अनुसार, नाबालिगों की सुरक्षा बढ़ाने और उनकी शिकायतों का जल्दी निपटान करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया है।
डेस्क को थाने में ऐसे स्थान पर रखा जाएगा, जहां बच्चों और अभिभावकों की आसानी से पहुंच हो। इसे लॉकअप एरिया से अलग रखा जाएगा।
बच्चों के लिए अलग से अधिकारी
डेस्क पर चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी के नाम, पदनाम तथा मोबाइल नंबर प्रमुखता से लगाए जाएंगे। ये नंबर चौबीस घंटे सक्रिय रहेंगे। विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी डीएसपी और जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करेंगे।
शिकायतों और सहायता अनुरोधों पर निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई की जाएगी तथा उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। यह डेस्क बच्चों के खिलाफ अपराधों के साथ-साथ किशोरों द्वारा किए गए आपराधिक मामलों में भी कार्रवाई करेगा।
बाल अपराध में बढ़ोत्तरी
पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में बाल अपराध के मामले ढाई से तीन गुना बढ़ गए हैं। वर्ष 2020 में 7631 बालक-किशोरों के खिलाफ 6543 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 21 हजार से अधिक हो गए।
2020 से 2025 तक के आंकड़ों में 80 हजार से अधिक आपराधिक मामलों में बालक-किशोर शामिल पाए गए। इनमें सबसे अधिक मामले चोरी, डकैती, वाहन चोरी, दुष्कर्म, नशीले पदार्थों की तस्करी या सेवन, साइबर अपराध और सामूहिक हिंसा से जुड़े हैं।
राज्य के थानों में महिलाओं से संबंधित मामलों के लिए महिला हेल्प डेस्क पहले से मौजूद है। बाद में इन डेस्कों पर ट्रांसजेंडर समुदाय की शिकायतें भी सुनने का निर्देश दिया गया है। यहां प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी तैनात की गई हैं।
